किशनपुरा दिखनादा में संविधान संगोष्ठी आयोजित

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-महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब के विचारों पर हुई विशेष चर्चा, विधायक अभिमन्यु पुनिया रहे मुख्य वक्ता
हनुमानगढ़। डॉ. अम्बेडकर युवा संघ किशनपुरा दिखनादा द्वारा संविधान निर्माता, विश्व रत्न, ज्ञान के प्रतीक व नारी मुक्तिदाता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर रविवार को संविधान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम गांव किशनपुरा दिखनादा स्थित अम्बेडकर चौक पर सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा व संगठन से जुड़े लोग उपस्थित रहे। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बाबा साहेब द्वारा निर्मित भारतीय संविधान की मूल भावना, सामाजिक समानता, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों पर जागरूकता फैलाना था।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता विधायक अभिमन्यु पुनिया थे। मुख्य अतिथि जिला कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर, जिला प्रमुख कविता मेघवाल, पूर्व राज्यमंत्री पवन गोदारा, पीसीसी सदस्य प्रेमराज नायक, पूर्व उपसभापति अनिल खीचड़, उपप्रधान कालूराम गोदारा, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोहित जावा, पार्षद गुरदीप चहल, ओबीसी जिलाध्यक्ष मनमोहन सोनी, कृषि उपज मण्डी समिति चैयरमैन अमरसिंह सिहाग, सरपंच सोनू चौपड़ा, सरपंच तानाराम मेघवाल थे। अध्यक्ष अध्यक्ष राकेश मेघवाल ने की। कार्यक्रम की शुरूवात अतिथियों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विधायक अभिमन्यु पुनिया ने बाबा साहेब के जीवन और संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में समानता, न्याय और मानवाधिकारों की दिशा में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों और अधिकारों की नींव है। पुनिया ने ग्रामीण युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएँ और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की शिक्षा ही समाज को मजबूत बनाती है और आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है।
मुख्य अतिथि जिला कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की लड़ाई लड़ी और हमें भी उनके मार्ग पर चलते हुए कमजोर वर्गों की आवाज को बुलंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को समान अवसर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया है। मक्कासर ने कहा कि आज का समय संविधान को समझने और उसके अनुसार समाज में सद्भाव बनाने का है।
जिला प्रमुख कविता मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब को पढ़े बिना भारत के लोकतंत्र को समझना संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा व स्वतंत्रता पर डॉ. अम्बेडकर के विचारों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को जिस स्तर का अधिकार और सम्मान मिला है, उसके पीछे बाबा साहेब की दूरदर्शिता है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर भी संविधान जनजागरण बहुत आवश्यक है।

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