धाणका जनजाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश

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संघर्ष समिति ने दी चेतावनी—12 दिसंबर तक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और तेज
हनुमानगढ़। 
अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत आने वाले धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्रों के जारी न होने को लेकर धाणका जनजाति संघर्ष समिति का जिला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर चल रहा शांतिपूर्ण धरना मंगलवार को 121वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से समाधान के अभाव में समाज में बढ़ता आक्रोश अब उग्र रूप लेने लगा है। समिति ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि 12 दिसंबर तक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार का लिखित आदेश न होने के बावजूद धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्र जानबूझकर रोके जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदनों पर अनियमित और अनावश्यक आपत्तियाँ लगाई जा रही हैं, जिससे पात्र परिवारों के आवेदन लंबित पड़े हैं। पहले से जमा प्रकरणों पर भी कार्रवाई न होने से समाज के गरीब, छात्र और मजदूर वर्ग को छात्रवृत्ति, प्रवेश, भर्ती व अन्य सरकारी योजनाओं में गंभीर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
समिति का कहना है कि शासन स्तर पर गठित समिति को सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्व में ही उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि धाणका समाज वर्षों से सामाजिक, राजनीतिक और गैर-राजनीतिक क्षेत्रों में योगदान देता आया है, इसके बावजूद आज उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों और विधायकों तक सभी स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने चेताया कि यदि मांगें अनसुनी रहीं तो आगामी समय में इसका राजनीतिक नुकसान सरकार को उठाना पड़ेगा।
समिति ने कहा कि प्रशासन ने 12 दिसंबर तक का समय मांगा है, लेकिन यदि इस अवधि में प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो संघर्ष समिति आंदोलन को व्यापक रूप देगा और जिलेभर में विरोध तेज किया जाएगा। समाज प्रतिनिधियों ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले का तत्काल समाधान करने की मांग की है।

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