Video: महाभारत में प्रेग्नेंट हो गए थे ये राजा, इन्होंने की थी डिलीवरी में मदद

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Mahabharata King Yuvanashwa
Mahabharata King Yuvanashwa

महाभारत में कई ऐसी कथाएं मिलती हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। इन्हीं में से एक कहानी है राजा युवनाश्व की, जिनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने पौराणिक कथाओं को और भी रहस्यमय बना दिया। इस कथा में एक पुरुष राजा के गर्भधारण और संतान जन्म की बात कही गई है, जो सुनने में असंभव लगती है।

राजा युवनाश्व की चिंता और यज्ञ का आयोजन
कथा के अनुसार, राजा युवनाश्व को संतान न होने का गहरा दुख था। वंश आगे बढ़ाने की चिंता में उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए विशेष यज्ञ करवाया। यज्ञ के बाद एक पवित्र चरू (प्रसाद) तैयार हुआ, जिसे रानी को ग्रहण करना था, ताकि संतान की प्राप्ति हो सके।

एक भूल और अद्भुत परिणाम
कहानी में बताया जाता है कि एक दिन जंगल में भ्रमण के दौरान राजा युवनाश्व को तेज प्यास लगी। उसी समय उन्होंने अनजाने में वही पवित्र चरू स्वयं पी लिया। इसी भूल के कारण एक असाधारण घटना घटी और राजा युवनाश्व गर्भवती हो गए। यह प्रसंग महाभारत की सबसे चौंकाने वाली कथाओं में गिना जाता है।

देवताओं की मदद से हुआ बालक का जन्म
जब प्रसव का समय आया तो राजा अत्यंत चिंतित हो गए। तब देवताओं से सहायता मांगी गई। कथा के अनुसार, देवराज इंद्र या अश्विनीकुमारों की कृपा से राजा की जांघ से बालक का जन्म हुआ। इस बालक का नाम मांधाता रखा गया, जो आगे चलकर एक महान और प्रतापी राजा बना।

इंद्र द्वारा दूध पिलाने की कथा
बालक के जन्म के बाद उसे दूध की आवश्यकता थी, लेकिन राजा युवनाश्व यह नहीं कर सकते थे। तब देवराज इंद्र ने बताया कि देवताओं की नसों में रक्त नहीं, बल्कि दूध प्रवाहित होता है। उन्होंने अपना अंगूठा काटकर शिशु मांधाता को दूध पिलाया। कहा जाता है कि इसी कथा से बच्चों के अंगूठा चूसने की परंपरा को जोड़ा जाता है।

 

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आधुनिक दौर में फिर चर्चा में आई कहानी
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने इस कथा को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई। लोगों ने इसे महाभारत की गहराई और कल्पनाशीलता का उदाहरण बताया।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
इस कथा को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे प्राचीन ग्रंथों की प्रतीकात्मक और प्रगतिशील सोच बताया, जबकि कुछ ने इसकी ऐतिहासिक और तार्किक व्याख्या पर सवाल भी उठाए। बावजूद इसके, यह कहानी आज भी लोगों की जिज्ञासा और कल्पना को जीवित रखे हुए है।