दिल्ली दंगा केस में उमर-शरजील की एक साल तक जमानत अटकी, जानें सुप्रीम कोर्ट क्यों लिया ऐसा फैसला?

138

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि इसी केस में शामिल पांच अन्य आरोपियों को सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी गई है। अदालत ने साफ कहा कि उमर और शरजील अब अगले एक साल तक इस मामले में नई जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे।

दरअसल, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पिछले 5 साल 3 महीने से तिहाड़ जेल में बंद थे। इन सभी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें UAPA के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।

ये भी पढ़ें: बिना सुनवाई के 4 साल: उमर खालिद को क्यों नहीं मिल रही जमानत? स्वरा भास्कर ने उठाई आवाज, देखें VIDEO

अनुच्छेद 21 और UAPA पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है और ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि UAPA एक विशेष कानून है, जिसमें जमानत के लिए सामान्य आपराधिक मामलों से अलग और सख्त शर्तें तय की गई हैं।

कोर्ट ने कहा कि राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े मामलों में सिर्फ देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि UAPA की धारा 43D(5) न्यायिक जांच को खत्म नहीं करती, लेकिन यह अपने आप में जमानत का अधिकार भी नहीं देती।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

हर आरोपी की स्थिति अलग
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी नहीं है। जमानत पर फैसला करते समय हर आरोपी की भूमिका और उपलब्ध रिकॉर्ड का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है। इसी आधार पर पांच आरोपियों को 12 सख्त शर्तों के साथ जमानत दी गई, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली।

ये भी पढ़ें: ‘UAPA में सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार’ सुप्रीम कोर्ट बोला- हम नहीं सुनेंगे याचिका

ट्रायल में तेजी लाने के निर्देश
अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए और संरक्षित गवाहों की जांच बिना अनावश्यक देरी के पूरी की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ये निर्देश मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं हैं।

क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में दिल्ली में CAA और NRC के विरोध के दौरान हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान 750 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई थीं। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम को दंगे भड़काने की कथित साजिश के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया था। शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को और उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को हिरासत में लिया गया था।

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि दोनों दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल थे। पुलिस का यह भी कहना है कि सुनवाई में हो रही देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं और अगर सहयोग किया गया तो ट्रायल दो साल के भीतर पूरा किया जा सकता है।


देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।