श्री विश्वकर्मा जयंती पर मंदिर का 52वां वार्षिकोत्सव श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया

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हवन-यज्ञ, भजन संध्या, झांकियां व विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
हनुमानगढ़।
 श्री विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर शनिवार को श्री विश्वकर्मा मंदिर, इंदिरा चौक, हनुमानगढ़ टाउन में मंदिर का 52वां वार्षिकोत्सव बड़े ही श्रद्धा, आस्था एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री विश्वकर्मा मंदिर समिति की ओर से भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 9.15 बजे हवन-यज्ञ का शुभारंभ हुआ। हवन यज्ञ का विधिवत आयोजन मंदिर पुजारी पंडित दिनेश पांडेय एवं पंडित राकेश पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान मुख्य यजमान के रूप में पूर्व पार्षद लीलाधर पारीक उपस्थित रहे। हवन कुंड में मंदिर समिति के पदाधिकारियों, श्रद्धालुओं एवं विशेष आमंत्रित अतिथियों ने आहुतियां अर्पित कर भगवान विश्वकर्मा से सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर समिति के अध्यक्ष साधु राम जांगिड़ ने बताया कि समिति पिछले 51 वर्षों से निरंतर श्री विश्वकर्मा जयंती एवं वार्षिकोत्सव का आयोजन करती आ रही है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 52वां वार्षिकोत्सव पूरे उत्साह एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। हवन यज्ञ के पश्चात भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें आमंत्रित कलाकारों एवं संगीतकारों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की लीलाओं एवं उनके सृजनात्मक योगदान को दर्शाती भव्य झांकियां भी सजाई गईं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। झांकियों ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और निर्माण कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।उपप्रधान दर्शन सिंह सग्गु ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में लगभग 10 मन आटे की रोटियां, देसी घी का हलवा, आलू-छोले की सब्जी एवं दाल परोसी गई। श्रद्धालुओं ने सेवा कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। समिति सचिव देशराज मांडण ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का महान शिल्पकार माना जाता है। आधुनिक युग में हो रहे समस्त निर्माण कार्य उनकी कृपा से ही संभव हैं, इसलिए हस्तशिल्पी, राजमिस्त्री, इंजीनियर एवं तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग श्रद्धापूर्वक उनकी जयंती मनाते हैं। इस अवसर पर संरक्षक बग्गा सिंह, प्रधान साधु राम जांगिड़, उपप्रधान दर्शन सिंह सग्गु, सचिव देशराज मांडण, कोषाध्यक्ष जरनैल सिंह, पूर्व प्रधान बिहारी लाल सुथार, सुरजाराम ठेकेदार, बलविंद्र सिंह,बाबू लाल जागिड़,कुलदीप सिंह,केवलकृष्ण,प्रकाश जागीड़,थान सिंह,बजरंग शर्मा,विष्णु गुप्ता,राजू जाखड़,सीतारम बड़वा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समिति की ओर से अतिथियों का माला पहनाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अंत में समिति पदाधिकारियों ने सभी सहयोगकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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