नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड डील) के ढांचे की घोषणा के साथ ही एक और चीज चर्चा में आ गई। दरअसल, इस समझौते का ब्योरा जारी करते समय ट्रंप प्रशासन की ओर से साझा किए गए भारत के एक नक्शे ने सोशल मीडिया और कूटनीतिक हलकों में खासा ध्यान खींचा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा जारी इस नक्शे में पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) भी शामिल है, को भारत का हिस्सा दिखाया गया है। इतना ही नहीं, नक्शे में अक्साई चिन को भी भारत के हिस्से के रूप में दर्शाया गया है, जिस पर चीन दावा करता रहा है।
हालांकि, भारत की क्षेत्रीय अखंडता को किसी विदेशी देश की मंजूरी की जरूरत नहीं है। भारत हमेशा से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। बावजूद इसके, अमेरिका की ओर से जारी यह नक्शा उसकी पहले की नीति से एक अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। जानबूझकर हो या अनजाने में, इस कदम को पाकिस्तान के लिए एक मजबूत कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
क्यों अहम है अमेरिका का यह नक्शा?
अब तक अमेरिका या उसके विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नक्शों में POK को लेकर अलग तरह की सीमांकन रेखाएं दिखाई जाती थीं, जो पाकिस्तान की आपत्तियों को ध्यान में रखकर बनाई जाती थीं। लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी ताजा नक्शा साफ तौर पर पाकिस्तान के दावों को नजरअंदाज करता दिख रहा है।

इसका समय भी बेहद अहम माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के रिश्ते एक बार फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें चल रही हैं। इससे पहले ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो अमेरिका के सहयोगी देशों में सबसे ज्यादा था। अब नए ट्रेड डील फ्रेमवर्क के तहत इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जो एशियाई देशों में सबसे कम बताया जा रहा है।
इसी बीच ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान को एक साथ जोड़कर देखने की कोशिश भी की थी, जिसे विशेषज्ञ री-हाइफनेशन कहते हैं। यह नीति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दौर में खत्म की गई थी और बाद के राष्ट्रपतियों ने भी इसे जारी रखा था।

अक्साई चिन को लेकर अमेरिका का बड़ा दावा?
अमेरिका के इस नक्शे में लद्दाख के अक्साई चिन इलाके को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है। यह वही इलाका है, जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है। भारत ने हमेशा चीन के इस दावे को खारिज किया है। गौरतलब है कि भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) पहले भी कई बार अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत की सीमाओं, खासकर जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को गलत तरीके से दिखाए जाने पर आपत्ति जताता रहा है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम भारत की पुरानी आपत्तियों को मान्यता देने जैसा माना जा रहा है।
एक्सपर्ट और सोशल मीडिया पर क्या आयी प्रतिक्रिया?
अमेरिका के इस कदम पर भू-राजनीतिक विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने ट्वीट करते हुए कहा, “मैप के लिए अमेरिका को पूरे नंबर। शानदार कदम।” एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “यह पाकिस्तान और उसके सैन्य प्रमुख असीम मुनीर के लिए बड़ा झटका है,” यह टिप्पणी इस्लामाबाद की ओर से वॉशिंगटन को साधने की कोशिशों के संदर्भ में की गई।
पिछले छह महीनों में पाकिस्तान की कूटनीति काफी सक्रिय रही है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर तीन बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं और दो बार ट्रंप से मुलाकात भी कर चुके हैं। जून में हुई एक चर्चित लंच मीटिंग में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से बिना किसी नागरिक नेतृत्व की मौजूदगी के मुलाकात की थी।एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ट्रेड डील बाद की बात है। असली बदलाव तो इस नक्शे में है, जिसमें POK को भारत का हिस्सा दिखाया गया है।”
ट्रेड डील से भारत को राहत
यह अंतरिम व्यापार समझौता, जो संभवतः मार्च के मध्य में साइन किया जाएगा, भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। 50 फीसदी के भारी टैरिफ के बाद अब भारत को स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर, फार्मा, कारों और ऑटो पार्ट्स में कई रियायतें मिली हैं। वहीं, भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर अपनी लाल रेखाएं कायम रखी हैं।
अब यह देखना बाकी है कि अमेरिका का यह नक्शा उसकी नीति में भारत की ओर झुकाव का संकेत है या फिर ट्रंप के साथ बीते एक साल के तनाव के बाद भारत को मनाने की एक रणनीतिक कोशिश। यह भी संभव है कि यह महज एक प्रशासनिक चूक हो। लेकिन इतना तय है कि इस नक्शे ने भारत को कूटनीतिक तौर पर मजबूत स्थिति और ‘ब्रैगिंग राइट्स’ जरूर दिए हैं और उसके संवेदनशील क्षेत्रीय दावों को और मजबूती दी है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।






































