अमेरिका में टैरिफ (Us India Tariff ) को लेकर जारी कानूनी और राजनीतिक उठापटक के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर स्थिति लगभग स्पष्ट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने और उसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नए 10% वैश्विक टैरिफ के ऐलान के बावजूद भारत-यूएस ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
Donald Trump ने शुक्रवार को कहा कि भारत के साथ प्रस्तावित समझौता पहले की तरह ही आगे बढ़ेगा। उनके मुताबिक, इस फैसले से द्विपक्षीय व्यापार वार्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इसके बाद अमेरिका सरकार ने एक नया आदेश जारी किया, जिसमें अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की गई। व्यापार विशेषज्ञों और निर्यातकों ने शनिवार को कहा कि अब 24 फरवरी से भारतीय सामान पर केवल 10 प्रतिशत पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ लगेगा।
20 फरवरी की अपनी घोषणा में ट्रम्प ने कहा, “मैं 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत मूल्य आधारित (एड वेलोरम) अस्थायी आयात शुल्क लागू करता हूं। यह 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।”
दरअसल, Supreme Court of the United States द्वारा पुराने ग्लोबल टैरिफ को रद्द किए जाने के करीब तीन घंटे के भीतर ट्रम्प ने सभी देशों पर 10% का नया समान टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, भारत के साथ होने वाली डील में यह नया 10% टैरिफ अतिरिक्त रूप से जोड़ा जाएगा या पहले से तय 18% दर में समायोजित किया जाएगा, इस पर ट्रम्प ने स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे वे देश जिन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए हैं, अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 10% का समान वैश्विक टैरिफ झेलेंगे। Trade Act of 1974 के इस प्रावधान के तहत लगाया गया टैरिफ पहले तय दरों की जगह लेगा। इससे भारत पर कुल टैरिफ 18% से घटकर 10% रह सकता है।
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23 फरवरी से अहम बैठक, कानूनी ड्राफ्ट पर होगी चर्चा
भारत और अमेरिका के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक 23 फरवरी से अमेरिका में शुरू होगी, जो तीन दिनों तक चलेगी। इस बैठक का उद्देश्य 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के आधार पर व्यापार समझौते का कानूनी मसौदा तैयार करना है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। माना जा रहा है कि टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने से संबंधित आधिकारिक आदेश इसी या अगले सप्ताह जारी हो सकता है।
टैरिफ में प्रस्तावित कमी से भारत के कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे निर्यात क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की वार्ता इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।
कोर्ट के फैसले पर ट्रम्प की कड़ी प्रतिक्रिया
Donald Trump ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ जज देशहित में सही निर्णय लेने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कुछ न्यायाधीश अमेरिका को मजबूत बनाने वाली नीतियों का लगातार विरोध करते हैं।
हालांकि, उन्होंने उन तीन कंजरवेटिव जजों की सराहना की जिन्होंने फैसले से असहमति जताई। ट्रम्प का कहना था कि उन्हें टैरिफ लागू करने के लिए संसद की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और वे राष्ट्रपति को मिले अधिकारों के तहत यह कदम उठा सकते हैं। भारत के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया।
सभी टैरिफ समाप्त नहीं हुए
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रम्प प्रशासन के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लागू किए गए थे, इसलिए वे जारी रहेंगे।
हालांकि दो प्रमुख श्रेणियों के टैरिफ निरस्त हुए हैं। पहली श्रेणी ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की थी, जिसमें चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। दूसरी श्रेणी 25% टैरिफ की थी, जो कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगाया गया था।

12 राज्यों ने दी थी कानूनी चुनौती
इन टैरिफ के खिलाफ 12 अमेरिकी राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने अदालत में याचिका दायर की थी। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर आयात पर टैरिफ लगाए।
अब नए 10% वैश्विक टैरिफ की घोषणा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सेक्शन 122 के तहत उठाए गए इस कदम पर अदालतों का क्या रुख रहता है और इसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर क्या असर पड़ता है।
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