
भारत के लिए गर्व की खबर है। ‘एजुकेट गर्ल्स’ की फाउंडर सफीना हुसैन को TIME की Women of the Year 2026 सूची में शामिल किया गया है। इस लिस्ट में दुनिया भर की 16 ऐसी महिलाओं को जगह दी गई है, जो महिलाओं और लड़कियों के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों पर काम कर रही हैं।
TIME के मुताबिक, यह सूची उन नेताओं को सम्मान देती है जो 2026 में महिलाओं और बेटियों से जुड़े अहम मुद्दों पर बदलाव ला रही हैं। सफीना इस साल जिन 16 वैश्विक हस्तियों के साथ चुनी गई हैं। उनमें दो अन्य भारतीय महिला रेशमा केवलरमानी और रेशमा सौजानी का नाम भी है। इसके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री Teyana Taylor, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट धाविका Sydney McLaughlin-Levrone और मशहूर अभिनेत्री-प्रोड्यूसर Lucy Liu जैसी बड़ी शख्सियतें को भी इस सूची में जगह मिली है।
सफीना ने हाल ही में अपनी किताब ‘Every Last Girl’ भी लिखी है। यह किताब ‘अंतिमबाला’ नाम की एक लड़की को समर्पित है। उसका नाम इसलिए ऐसा रखा गया क्योंकि उसके माता-पिता चाहते थे कि वह उनकी ‘आखिरी बेटी’ हो। यह नाम ही समाज में बेटियों को लेकर सोच दिखाता है।
Safeena Husain Shines on TIME’s 2026 Women of the Year List!
Safeena Husain, Founder of Educate Girls, has been named to the 2026 Women of the Year list by @TIME — a powerful recognition of her transformative leadership and the movement advancing millions of girls across India. pic.twitter.com/lfLvsjtguO
— Educate Girls (@educate_girls) February 26, 2026
सफीना की कहानी खुद संघर्ष भरी रही है। TIME को दिए इंटरव्यू में सफीना ने कहा, उनका बचपन गरीबी और मुश्किल हालात में बीता। कई बार उनकी पढ़ाई बीच में रुक गई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार में विदेश जाकर पढ़ने वाली वह पहली सदस्य बनीं। करीब 10 साल अमेरिका में काम करने के बाद वह भारत लौटीं और ‘एजुकेट गर्ल्स’ शुरू की।
वह कहती हैं, ‘मैं जानती हूं पीछे छूट जाने का दर्द क्या होता है। इसलिए हमारा पूरा फोकस उन लड़कियों पर है जो स्कूल से बाहर हैं।’ एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी भी करीब 16% स्कूली उम्र की लड़कियां स्कूल नहीं जातीं। सेफीना का लक्ष्य है कि 2035 तक उनकी संस्था 1 करोड़ बच्चों तक पहुंचे।
Thank you @airnewsalerts for highlighting this historic recognition.
Honoured to be the first Indian organisation to receive the Ramon Magsaysay Award, a recognition for India and for girls’ education. ✨#EducateGirls #RamonMagsaysayAward https://t.co/aHRLFAHC0X— Educate Girls (@educate_girls) September 1, 2025
एजुकेट गर्ल्स को हाल ही में मिला रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड
हाल ही में ‘एजुकेट गर्ल्स’ को रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड भी मिला। यह सम्मान पाने वाली यह पहली भारतीय गैर-सरकारी संस्था बनी है। सफीना कहती हैं, ‘दुनिया में आज भी करोड़ों लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। मैंने कभी किसी लड़की को ये कहते नहीं सुना कि वह पढ़ना नहीं चाहती। हर लड़की स्कूल जाना चाहती है। कोई भी बच्ची अपनी मर्जी से बाल विवाह या सिर्फ घर का काम नहीं करना चाहती।’ उनका साफ कहना है जब तक हर ‘आखिरी बेटी’ स्कूल नहीं पहुंचेगी, तब तक यह मिशन चलता रहेगा।’
A historic moment became real today in Manila. Educate Girls received the 2025 Ramon Magsaysay Award!
Yeh pal humara hai – the girls, our field teams, Team Balika, our Preraks, parents, communities, government, the team, partners, board and donors who stood by this journey. pic.twitter.com/uX7waeZygt
— Educate Girls (@educate_girls) November 7, 2025
2007 में शुरु हुआ एजुकेट गर्ल्स
सफीना हुसैन ने साल 2007 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की शुरुआत की थी। उनका मकसद था ग्रामीण, दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में स्कूल से बाहर रह रही लड़कियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना। गरीबी, लैंगिक भेदभाव और संसाधनों की कमी की वजह से लाखों लड़कियां आज भी स्कूल नहीं जा पातीं।

राजस्थान के कुछ गांवों से शुरू हुआ यह अभियान आज 12 राज्यों के 30,000 से ज्यादा गांवों तक पहुंच चुका है। संस्था अब तक 20 लाख से ज्यादा लड़कियों को फिर से स्कूल भेजने में मदद कर चुकी है और TED के Audacious Project का लक्ष्य भी पार कर चुकी है।
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