ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में प्रदर्शन

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अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत (khamenei Death Protests) की खबर के बाद उनके समर्थकों समेत मुस्लिम समुदाय में मातम पसरा हुआ है। अली खामेनेई की मौत का विरोध अब भारत में भी होना शुरू हो गया है। लखनऊ में खामेनेई की मौत पर मुस्लिम महिलाएं फफक-फफक कर रो रहीं हैं। वहीं, कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।

सुबह जैसे ही यह खबर फैली, हजारों लोग श्रीनगर के लाल चौक की ओर बढ़े और वहां इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए और खामेनेई के लिए मातमी शायरी (मरस्यिया) पढ़ी। पुराने शहर के इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतरे। यहां शिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। खामेनेई को दुनिया भर के शियाओं का आध्यात्मिक नेता माना जाता था।

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इसी बीच, जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (JKSSB) ने रविवार को होने वाली लैबोरेटरी अटेंडेंट की लिखित परीक्षा आखिरी समय पर टाल दी। बोर्ड ने नई तारीख बाद में घोषित करने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला घाटी में हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए लिया गया।

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अली खामेनेई के समर्थकों में मातम पसरा
हम माओं ने बेटों को कुर्बानियां देने के लिए पैदा किया है। इजराइल अमेरिका को लेकर कहा कि इन पर लानत है। यह धोखेबाज हैं। यह गद्दार हैं। इनसे कभी वफा नहीं हो सकती। इनकी नस्लें गद्दार और धोखेबाज हैं। कई महिलाएं जमकर रोती हुई दिखाई दे रही हैं।

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उमर अब्दुल्ला ने शांति बनाने की अपील 
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हालात को चिंताजनक बताया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान में हो रहे घटनाक्रम और खामेनेई की मौत की खबरें चिंता का विषय हैं। उन्होंने सभी समुदायों से शांति और भाईचारा बनाए रखने को कहा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार विदेश मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि ईरान में मौजूद राज्य के लोगों और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह एक दुखद और शर्मनाक घटना है। घाटी के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी खामेनेई की हत्या की निंदा की और सोमवार को बंद का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से शांति और एकजुटता बनाए रखने की अपील की।

जानिए कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई

  • अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे।
  • 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।
  • 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया।
  • 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
  • 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।

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