ईरान की दक्षिणी सीमा पर स्थित संकरा जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में इन दिनों असामान्य स्थिति बनी हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों और समुद्री ट्रैकिंग डेटा से संकेत मिल रहे हैं कि बड़ी संख्या में तेल टैंकर समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं। जहाजों की रफ्तार धीमी हो गई है और कई पोत आगे बढ़ने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं।
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा। इसके साथ ही समुद्री नेविगेशन सिस्टम में तकनीकी बाधाओं की शिकायतें सामने आने लगीं। आम तौर पर वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद यातायात पर असर पड़ा है।
कई जहाजों के कप्तानों ने बताया कि उनके नेविगेशन सिस्टम गलत लोकेशन दिखा रहे हैं। कुछ जहाजों की स्थिति समुद्र के बजाय जमीन पर या अन्य असंबंधित स्थानों पर दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह GPS सिग्नलों में व्यवधान के कारण हो सकता है।
Strait of Hormuz traffic drops sharply amid regional escalation
Vessel activity in the Strait of Hormuz has shifted materially following recent US strikes on Iran and the subsequent regional escalation. According to real-time traffic analysis, transits through the chokepoint… pic.twitter.com/COoh0W9jfk
— MarineTraffic (@MarineTraffic) March 2, 2026
समुद्री ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों में 28 फरवरी के बाद जहाजों की डिजिटल गतिविधि में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया। सामान्य रूप से सीधी रेखा में दिखने वाले मार्ग अब बिखरे हुए और अनियमित नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने तटीय इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैनात किए हैं, जिनका उद्देश्य विदेशी सैन्य तकनीक और रडार सिस्टम को बाधित करना है। हालांकि, इन उपायों का असर नागरिक जहाजों पर भी पड़ रहा है।
करीब 33 किलोमीटर चौड़े इस समुद्री मार्ग में 1,000 से अधिक टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की खबर है। बड़े तेल टैंकरों को दिशा बदलने या अचानक रुकने में समय लगता है, ऐसे में नेविगेशन में गड़बड़ी से टकराव का खतरा बढ़ जाता है। 1 मार्च को ओमान के पास एक टैंकर दुर्घटना का शिकार हुआ, जिसके बाद उसके चालक दल को सुरक्षित निकाला गया। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल थे।

बढ़ सकते हैं दाम?
लॉयड्स लिस्ट के अनुसार, हर रोज करीब 107 जहाज होर्मुज से गुजरते है। लेकिन 1 मार्च की लिस्ट में केवल 19 जहाजों के गुजरने का ही रिकॉर्ड दर्ज है। 1 मार्च को इस रूट से सिर्फ 4 सुपरटैंकर गुजरे, जिसका आंकड़ा एक दिन पहले ही 22 था। ऐसी स्थिति में माल ढुलाई का रेट बढ़ जाता है।
जो जहाज निकलते भी हैं, वे बेहद धीमी गति से चलते हैं। इससे यात्रा का समय बढ़ जाता है और सप्लाई चेन टाइट हो जाती है। दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा और एलएनजी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी पतले चैनल से गुजरता है। कई देश भले ही स्ट्रेटेजिक रिजर्व रखते हों, लेकिन ये स्टॉक केवल कुछ महीनों की मांग ही पूरी कर सकते हैं।
भारत-चीन के लिए बढ़ी टेंशन?
भारत गल्फ से क्रूड और गैस इंपोर्ट करता है, जो होर्मुज से गुजरता है। इसलिए सप्लाई बाधित होने से कीमते बढ़ेंगी, रूपये पर दबाव पड़ेगा और फिर महंगाई बढ़ेगी। चीन भी गल्फ पर ही निर्भर है, लेकिन उसके पास रूस और सेंट्रल एशिया का बड़ा स्टोरेज रिजर्व है। चीन के पास पाइपलाइन लिंक भी है।
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