India vs England: इंग्लैंड से सेमीफाइनल मैच में ये 9 गलतियां भारत को पड़ सकती हैं महंगी

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न्यूजीलैंड की टीम बुधवार को पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर फाइनल में पहुंच चुकी है। दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम का मुकाबला 8 मार्च को टूर्नामेंट के फाइनल में न्यूजीलैंड से होगा। वहीं आज भारत और इंग्लैंड के बीच (India vs England T20 World Cup 2026) दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा। मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा।

दोनों टीमें सेमीफाइनल में लगातार तीसरी बार भिड़ेंगी। इससे पहले 2022 और 2024 में भी दोनों के मैच हुए, 1-1 जीत दोनों को मिली। भारत की टीम छठी बार टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची है। टीम इससे पहले 2007, 2014, 2016, 2022 और 2024 में भी टॉप-4 टीमों में जगह बना चुकी है, टीम ने 5 में से 3 सेमीफाइनल जीते।

वहीं, इंग्लैंड भी छठी बार सेमीफाइनल खेल रहा है। इससे पहले टीम 2010, 2016, 2021, 2022 और 2024 में इस स्टेज तक पहुंची थी। 3 सेमीफाइनल जीतकर टीम ने फाइनल में जगह बनाई थी।

भारत के सेमीफाइनल तक पहुंचते-पहुंचते टीम की कई ऐसी कमियां मैदान में सामने आई हैं जिनके कारण टीम इंडिया के लिए फाइनल में पहुंचने का सफर मुश्किल हो सकता है। खासकर टॉप ऑर्डर की अस्थिर बल्लेबाजी, गेंदबाजी पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता और फील्डिंग की गलतियां टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। आइए जानते हैं कि भारतीय टीम की बड़ी कमियां कौन-कौन सी हैं।

1. टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी: भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता शुरुआती बल्लेबाजों का जल्दी आउट हो जाना है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में पावरप्ले के दौरान ही तीन विकेट गिर गए थे, जबकि अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में टीम ने पहले छह ओवर में चार विकेट गंवा दिए थे। बड़े मैचों में अगर टॉप ऑर्डर इसी तरह जल्दी आउट होता है तो टीम पर दबाव बढ़ सकता है।

2. तेज गेंदबाजों के खिलाफ मुश्किल: इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर पावरप्ले में काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। इस टूर्नामेंट में उन्होंने पावरप्ले के दौरान सबसे ज्यादा डॉट गेंदें डाली हैं। खास बात यह है कि उनका रिकॉर्ड संजू सैमसन के खिलाफ भी अच्छा रहा है, जिससे भारत के लिए शुरुआत और मुश्किल हो सकती है।

3. बल्लेबाजी यूनिट के तौर पर टीम का प्रदर्शन कमजोर: भारत के पास मजबूत बैटिंग लाइनअप है, लेकिन अभी तक बल्लेबाज एक टीम के रूप में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। अलग-अलग मैचों में अलग-अलग खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन पूरी बैटिंग यूनिट का एक साथ चलना अभी बाकी है।

4. अभिषेक शर्मा का खराब फॉर्म: ओपनर अभिषेक शर्मा का बल्ला पूरे टूर्नामेंट में खामोश रहा है। छह पारियों में उन्होंने बहुत कम रन बनाए हैं और शुरुआती तीन मैचों में तो शून्य पर ही आउट हो गए थे। उनकी एकमात्र बड़ी पारी भी जिम्बाब्वे के खिलाफ आई थी।

5. बल्लेबाजों का टॉप रन स्कोरर्स में न होना: टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने के बावजूद टूर्नामेंट के शीर्ष पांच रन बनाने वाले बल्लेबाजों में भारत का कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है। इससे साफ होता है कि बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी रही है।

6. वरुण चक्रवर्ती पर ज्यादा निर्भरता: स्पिनर वरुण चक्रवर्ती भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं और उन्होंने सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। लेकिन टीम की स्पिन गेंदबाजी काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर दिख रही है। पिछले कुछ मैचों में बल्लेबाजों ने उनकी रणनीति को भी थोड़ा समझना शुरू कर दिया है।

7. अक्षर पटेल का प्रभाव कम होना: उपकप्तान अक्षर पटेल से टीम को ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन सुपर-8 चरण में उनका प्रदर्शन उतना प्रभावी नहीं रहा। उन्होंने कम विकेट लिए और रन भी ज्यादा खर्च किए।

8. फील्डिंग में लगातार गलतियां: भारतीय टीम ने कई शानदार कैच पकड़े हैं, लेकिन काफी मौके भी गंवाए हैं। पूरे टूर्नामेंट में टीम कई कैच छोड़ चुकी है। हाल ही में एक मैच में अभिषेक शर्मा ने अकेले दो कैच छोड़ दिए थे।

9. ड्यू फैक्टर की चुनौती: इस टूर्नामेंट में रात के मैचों में ओस बड़ा फैक्टर साबित हो रही है। ओस की वजह से गेंदबाजों को गेंद पकड़ने और स्पिन कराने में परेशानी होती है। वानखेड़े स्टेडियम में भी नमी ज्यादा रहने की संभावना है, जिससे गेंदबाजों को मुश्किल हो सकती है।

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