हनुमानगढ़ । राजस्थान पुलिस में अधीनस्थ पुलिस सेवा से कांस्टेबल से लेकर निरीक्षक स्तर के प्रमोशन पदोन्नति परीक्षा की बजाय डीपीसी से करवाने की मांग को लेकर गुरुवार राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान के सदस्यो ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन पुलिस महानिरीक्षक राजेश मीणा व जिला कलेक्टर रुक्मणि रियार को ज्ञापन सौंपा।संस्थान के संरक्षक सेवानिवृत एएसपी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस में अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े कांस्टेबल से लेकर निरीक्षक स्तर के कर्मचारियों के प्रमोशन राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों के तहत एग्जाम से हो रहे हैं। प्रमोशन एग्जाम में लिखित फिजिकल, इंटरव्यू तीन स्तर पर अभ्यर्थी का परीक्षण किया जाता है।
अखिल भारतीय स्तर पर सभी राज्यों (पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, यूपी, उत्तराखण्ड कर्नाटक आदि ) अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े पुलिस कर्मियों के प्रमोशन पदोन्नति परीक्षा की बजाए डीपीसी से हो रहे हैं ।उन्होमे बताया कि राजस्थान में भी पुलिस में आरपीएस से आईपीएस स्तर के अधिकारियों के प्रमोशन डीपीसी ऑर्डर के जरिये हो रहे हैं ओर राजस्थान में ही अन्य बेल्ट सर्विसेज वनपाल, वनरक्षक, मोटर व्हीकल एसआई के प्रमोशन डीपीसी से हो रहे हैं। इसके अलावा अन्य सभी राज्यों में पदोन्नति डीपीसी से हो रही है। आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स में भी प्रमोशन प्रत्येक रैंक पर डीपीसी ऑर्डर से हो रहे हैं। प्रमोशन में इस विसंगति को दूर करने कर डीपीसी से प्रमोशन करवाने की मांग समय समय पर जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा में भी उठाई गई है परन्तु सम्बंधित विभाग द्वारा करवाई जा रही प्रमोशन परीक्षा प्रणाली को सुगम बनाए जाने की बजाय गत वर्ष इसे और पेचीदा बना दिया गया है.
इस कारण अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के प्रमोशन समय पर नहीं हो पाते और वे बिना प्रमोशन ही रिटायर हो जाते हैं। सेवानिवृत एएसआई हीरालाल ने बताया कि आज तक पुलिस विभाग कभी भी समय पर पदोन्नति परीक्षाओं का आयोजन नहीं करवा पाया है, इस तरह एग्जाम के जरिये प्रमोशन करवाने जाने की प्रक्रिया मनमानी व अवैध है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष कांस्टेबल से हैड कांस्टेबल पदोन्नति में 50 परसेंट परीक्षा के जरिये अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन के उपरांत जारी किया गया जिसके विरूद्ध माननीय जयपुर उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी करते हुए वर्तमान में कांस्टेबल से निरीक्षक स्तर की पदोन्नति परीक्षाओं पर रोक लगा दी है।
मध्यप्रदेश में भी न्यायालय से स्थगन आदेश के चलते काफी वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया रूकी हुई थी इस पर संज्ञान ले
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