11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे (World Population Day 2025) मनाया जाता है। एक ऐसा दिन जब दुनिया जनसंख्या की दिशा और दशा को लेकर सोचती है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट और विभिन्न जनगणना आंकड़ों से चौंकाने वाले ट्रेंड सामने आए हैं।
दुनिया (World Population Day) में एक ओर जहां मुस्लिम आबादी सबसे तेज़ी से बढ़ रही है, वहीं हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही पहली बार वैश्विक आंकड़ों में यह सामने आया है कि हर चौथा व्यक्ति अब किसी धर्म को नहीं मानता — यानी वह नास्तिक या ‘religiously unaffiliated’ है। आइए, जानते हैं इन आंकड़ों का क्या मतलब है और इनके पीछे की सामाजिक-राजनीतिक तस्वीर क्या है।
सबसे तेज़ी से बढ़ती आबादी: मुस्लिम समुदाय
प्यू रिसर्च और संयुक्त राष्ट्र की जनसंख्या रिपोर्टों के अनुसार, मुस्लिम समुदाय वर्तमान में विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ रही आबादी है। अनुमान है कि 2060 तक मुस्लिम आबादी करीब 3 अरब के पार हो जाएगी, जो कुल विश्व जनसंख्या का लगभग 30% होगी।
इसका सबसे बड़ा कारण है मुस्लिम समाज में उच्च प्रजनन दर (fertility rate)। जहां विश्व की औसत प्रजनन दर करीब 2.3 है, वहीं कई मुस्लिम-बहुल देशों में यह 3.0 से ऊपर है। दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों में यह दर विशेष रूप से अधिक है।
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हिंदू जनसंख्या में गिरावट क्यों?
हिंदू धर्म, जो भारत की पहचान और बहुसंख्यक संस्कृति का आधार रहा है, अब जनसंख्या के आंकड़ों में धीरे-धीरे पीछे खिसकता दिख रहा है। भारत में टीएफआर (Total Fertility Rate) हिंदुओं के बीच 1.94 तक गिर चुका है, जो जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए जरूरी न्यूनतम दर (2.1) से नीचे है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका कारण है शिक्षा, शहरीकरण, आर्थिक स्थिरता और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी जो आमतौर पर जन्म दर को कम करती है। लेकिन इसके साथ ही यह भी चिंता का विषय बनता जा रहा है कि अल्पसंख्यक समुदायों में प्रजनन दर अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है, जिससे जनसांख्यिकीय असंतुलन की आशंका जताई जाती है।

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विश्व स्तर पर धर्म के अनुसार जनसंख्या (2020)
| धर्म | वैश्विक आबादी में हिस्सा | अनुमानित जनसंख्या (2020) | 2050 अनुमानित हिस्सा | वार्षिक वृद्धि दर (औसतन) |
|---|---|---|---|---|
| ईसाई | 31.1% | ~2.38 अरब | ~31.4% | ~1.2% |
| मुस्लिम | 24.9% | ~1.91 अरब | ~29.7% | ~1.9% (सबसे तेज़) |
| नास्तिक / धर्महीन | 16.4% | ~1.27 अरब | ~13.2% | ~0.1% (स्थिर/गिरावट की ओर) |
| हिंदू | 15.2% | ~1.2 अरब | ~14.9% | ~1.2% |
| बौद्ध | 6.6% | ~50 करोड़ | ~5.2% | ~0.5% (गिरावट) |
| लोकधर्म / पारंपरिक धर्म | 5.9% | ~45 करोड़ | ~4.8% | ~0.3% (धीमा विकास) |
| अन्य धर्म | 0.8% | ~6 करोड़ | ~0.7% | ~0.3% |
| यहूदी | 0.2% | ~1.5 करोड़ | ~0.2% | ~0.3% |
नोट: ये अनुमान Pew Research “The Future of World Religions: Population Growth Projections, 2015-2050” रिपोर्ट से लिए गए हैं।
दुनिया में हर चौथा व्यक्ति नास्तिक
शायद सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि आज दुनिया की लगभग 26% आबादी किसी भी धर्म से जुड़ी नहीं है। ये लोग खुद को atheist (नास्तिक), agnostic (संशयवादी) या “spiritual but not religious” मानते हैं। यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे विकसित देशों में धर्म से दूरी तेजी से बढ़ी है। चीन, जो दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, वहां की 90% से अधिक आबादी धार्मिक रूप से निष्क्रिय मानी जाती है।
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भारत का धर्म-आधारित जनसंख्या विश्लेषण भारत में 2021 की नागरिक रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट और एनएफएचएस डेटा बताते हैं कि:
- हिंदू आबादी 79.8% से घटकर करीब 77.7% पर आ गई है।
- मुस्लिम आबादी 14.2% से बढ़कर लगभग 15.5% तक पहुंची है।
- ईसाई, सिख, बौद्ध और अन्य धर्मों की संख्या लगभग स्थिर है।
- नास्तिकों की संख्या भारत में अभी भी कम है, लेकिन शहरी युवाओं में इनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है।
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क्या ये सिर्फ आंकड़े हैं या बदलती पहचान?
बढ़ती मुस्लिम आबादी पर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जनसांख्यिकीय चुनौती भी है। दूसरी ओर, हिंदू समाज की गिरती जन्मदर चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि इसके साथ जुड़ा है एक सांस्कृतिक अस्तित्व का सवाल।
नास्तिकता का उभार यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी धार्मिक परंपराओं से अधिक व्यक्तिगत सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व देने लगी है। लेकिन यह भी एक सवाल छोड़ता है — क्या धर्म की भूमिका समाज में खत्म हो रही है, या बस उसका रूप बदल रहा है?
भारत में धर्म के अनुसार जनसंख्या का वितरण
| धर्म | 2001 की जनगणना | 2011 की जनगणना | 2021 अनुमान* | वृद्धि दर (2001-2011) | अनुमानित प्रवृत्ति |
|---|---|---|---|---|---|
| हिंदू | 80.5% (82.75 करोड़) | 79.8% (96.63 करोड़) | ~78% | +16.8% | प्रतिशत में गिरावट, संख्या में वृद्धि |
| मुस्लिम | 13.4% (13.8 करोड़) | 14.2% (17.22 करोड़) | ~15% | +24.6% | प्रतिशत व संख्या दोनों में वृद्धि |
| ईसाई | 2.3% (2.4 करोड़) | 2.3% (2.78 करोड़) | ~2.2% | +15.5% | स्थिर |
| सिख | 1.9% (1.93 करोड़) | 1.7% (2.08 करोड़) | ~1.6% | +8.4% | गिरावट |
| बौद्ध | 0.8% (0.79 करोड़) | 0.7% (0.84 करोड़) | ~0.7% | +13.8% | स्थिर या थोड़ी गिरावट |
| जैन | 0.4% (0.42 करोड़) | 0.4% (0.45 करोड़) | ~0.3% | +5.4% | गिरावट |
| अन्य धर्म | 0.6% | 0.7% | ~0.7% | +23.5% | आदिवासी/स्थानीय पंथ |
| धर्म नहीं बताया / नास्तिक | ~0.07% | ~0.24% (28.7 लाख) | ~2%+ | +237% | तेज़ वृद्धि, खासकर युवा वर्ग में |
नोट: 2021 अनुमान Pew Research, NFHS-5, और अन्य स्रोतों पर आधारित है। कोविड के कारण कुछ देशों में डेटा संग्रह धीमा हुआ है, इसलिए हालिया अनुमान थोड़े पुराने सर्वे पर आधारित हैं।
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