एक तरफ दुनिया प्लास्टिक के ज़हर से जूझ रही है, हर साल दुनिया भर में लगभग 40 करोड़ टन प्लास्टिक बनाया जाता है, जिसमें से केवल 9% ही रीसायकल हो पाता है। बाकी प्लास्टिक नदियों, समुद्रों, जंगलों और यहाँ तक कि इंसानों के शरीर में भी माइक्रोप्लास्टिक के रूप में घुल चुका है।
लेकिन अब उम्मीद की एक किरण अमेज़न के जंगलों में मिली है। वैज्ञानिकों ने यहां एक खास फंगस (कवक) (plastic eating fungus amazon) की पहचान की है जो प्लास्टिक को ‘खा’ सकता है, यानी उसे प्राकृतिक रूप से डीग्रेड कर सकता है। वह भी बिना ऑक्सीजन के वातावरण में। जिसे वैज्ञानिक पेस्टालोटियोप्सिस माइक्रोस्पोरा (Pestalotiopsis microspora) कह रहे हैं।
क्या है यह फंगस?
इस फंगस का नाम है (Pestalotiopsis microspora) पेस्टालोटियोप्सिस माइक्रोस्पोरा हैं।यह पहली ऐसी ज्ञात प्रजाति है जो पॉलीयूरीथेन (Polyurethane) जैसे टिकाऊ प्लास्टिक को तोड़ सकती है — वो भी ऐसे वातावरण में जहां ऑक्सीजन न हो। यह फंगस नमी और घने वनों में पनपता है, और इसे येल यूनिवर्सिटी की एक शोध टीम ने 2011 में अमेज़न के वर्षावनों में खोजा था।
ये भी पढ़ें: जानें कितना मंहगा है दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी ‘गुइलेन-बैरे सिंड्रोम’ का इलाज, 101 एक्टिव मरीज
कैसे करता है यह काम?
Pestalotiopsis microspora प्लास्टिक को अपनी ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। जहां आम बैक्टीरिया और फंगस प्लास्टिक के सामने बेबस हो जाते हैं, यह फंगस उसे बायोलॉजिकल एंज़ाइम्स की मदद से तोड़ देता है। यह प्रक्रिया anaerobic conditions (बिना ऑक्सीजन वाले वातावरण) में भी होती है — यानी लैंडफिल जैसे प्लास्टिक के अड्डों में भी।
हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें

क्यों है यह खोज बड़ी?
- हर साल दुनिया में 40 करोड़ टन से ज़्यादा प्लास्टिक बनता है, जिसमें से सिर्फ 9% ही रीसायकल हो पाता है।
- बाकी प्लास्टिक न तो नष्ट होता है, न ही सड़ता है। यह सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बना रहता है।
- ऐसे में यह फंगस प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक प्राकृतिक और टिकाऊ हथियार बन सकता है।

दुनिया में प्लास्टिक की स्थिति
| वर्ष | विश्व प्लास्टिक उत्पादन | रीसायकल दर | समुद्री प्लास्टिक कचरा |
|---|---|---|---|
| 2010 | 270 मिलियन टन | 7% | 8 मिलियन टन प्रति वर्ष |
| 2020 | 367 मिलियन टन | 9% | 11 मिलियन टन प्रति वर्ष |
| 2030* | ~500 मिलियन टन* | <10%* | ~20 मिलियन टन* |
अनुमानित आँकड़े, UNEP और OECD की रिपोर्ट्स के आधार पर

अब आगे क्या करने की तैयारी है…
वैज्ञानिक अभी इस फंगस की व्यावसायिक संभावना (commercial scalability) पर काम कर रहे हैं।
अगर इसे बड़ी मात्रा में तैयार किया जा सके और नियंत्रित वातावरण में इस्तेमाल किया जाए, तो यह कचरा प्रबंधन, लैंडफिल सफाई और समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण के लिए क्रांतिकारी समाधान बन सकता है। हालांकि, इस तकनीक को व्यवहार में लाने में अभी समय लगेगा। यह केवल प्रयोगशाला की खोज नहीं रह जाए, इसके लिए नीतिगत सहयोग, फंडिंग और पायलट प्रोजेक्ट्स की ज़रूरत होगी।
ताजा अपडेट्स के लिए आप पञ्चदूत मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, ऐप को इंस्टॉल करने के लिए यहां क्लिक करें.. इसके अलावा आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।




































