अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा पूरी कर भारतीय वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) समेत चार अंतरिक्ष यात्री सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए हैं। स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने करीब 23 घंटे के सफर के बाद 14 जुलाई की दोपहर 3 बजे (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया के तटवर्ती समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग की।
चारों एस्ट्रोनॉट्स ने 13 जुलाई को शाम 4:45 बजे (IST) ISS से वापसी की यात्रा शुरू की। इसके बाद लगभग 23 घंटे तक वे पृथ्वी की कक्षा में ड्रैगन कैप्सूल में रहे, जिसके बाद 14 जुलाई को सफलतापूर्वक समुद्र में उनकी स्प्लैशडाउन लैंडिंग हुई। स्पेसएक्स के रिकवरी क्रू ने चारों को कैप्सूल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया और प्राथमिक मेडिकल जांच के बाद उन्हें बेस पर लाया गया।
यह मिशन अमेरिकी निजी कंपनी Axiom Space के Axiom Mission 4 (Ax-4) का हिस्सा था, जिसमें चारों एस्ट्रोनॉट ने लगभग 20 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताए। इस मिशन में शुभांशु शुक्ला के साथ अन्य तीन अंतरिक्षयात्री भी शामिल थे, जिन्होंने मिलकर ISS पर कई वैज्ञानिक प्रयोग, अंतरिक्षीय सिस्टम टेस्टिंग और शैक्षिक संवाद पूरे किए।
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#BreakingNews | In a landmark achievement, Group Captain #ShubhanshuShukla and the #Axiom-4 crew have returned to Earth, splashing down in the Pacific Ocean aboard the Dragon spacecraft after an 18-day mission aboard the International Space Station. pic.twitter.com/tiAMzXCCSW
— DD News (@DDNewslive) July 15, 2025

स्पेस में क्यों गए थे शुभांशु शुक्ला
इस मिशन में शुभांशु शुक्ला की भूमिका ने भारत के स्पेस मिशन की प्रतिष्ठा को और ऊंचा किया है। वे Axiom के माध्यम से प्राइवेट मिशन पर जाने वाले चुनिंदा भारतीयों में से एक हैं। मिशन के दौरान उन्होंने जीवविज्ञान, माइक्रोग्रैविटी में शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और पृथ्वी की निगरानी से जुड़ी रिसर्च में हिस्सा लिया।
जानकारी के मुताबिक, शुभांशु ने मिशन के दौरान 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया। इनमें भारत के सात प्रयोग शामिल थे। उन्होंने मेथी और मूंग के बीजों को अंतरिक्ष में उगाया। स्पेस माइक्रोएल्गी’ प्रयोग में भी हिस्सा लिया। अंतरिक्ष में हड्डियों की सेहत पर भी प्रयोग किए। इसके अलावा, 6 जुलाई को उन्होंने ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की, जिसमें उनके प्रयोगों और भारत के गगनयान मिशन के लिए उनके योगदान पर चर्चा हुई।
भारत के किस काम आएगा शुभांशु शुक्ला का योगदान
शुभांशु शुक्ला एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा हैं, जिसकी एक सीट के लिए भारत ने 548 करोड़ रुपए चुकाए हैं। यह एक प्राइवेट स्पेस फ्लाइट मिशन है, जो अमेरिकी स्पेस कंपनी एक्सियम, NASA, इसरो और स्पेसएक्स की साझेदारी से हो रहा है। शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है। भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है। इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं।
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