क्या आपने कभी सोचा है कि रोज़मर्रा के लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले नोट आपकी सेहत के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं? राजस्थान की सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ किशनगढ़ में हुई एक रिसर्च ने इस पर से पर्दा उठाया है। अध्ययन में पाया गया है कि भारतीय करेंसी नोट (Indian Currency Bacteria ), खासकर 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट, खतरनाक बैक्टीरिया और फंगस से भरे हुए हैं। यही सूक्ष्मजीव गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं।
रिसर्च टीम ने अलग-अलग डिनॉमिनेशन के नोटों की जांच की। परिणाम चौंकाने वाले थे। छोटे नोटों पर सबसे ज्यादा बैक्टीरिया और फंगस पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि 10, 20 और 50 रुपये के नोट रोज़ाना सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं। ये छोटे-छोटे लेन-देन में चलते रहते हैं और अक्सर गंदे, गीले या पसीने वाले हाथों से छुए जाते हैं। यही वजह है कि इन पर संक्रमण की परत जल्दी चढ़ जाती है।
कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं? वैज्ञानिकों का कहना है कि करेंसी नोटों से मुख्य रूप से ये खतरे पैदा हो सकते हैं:
- स्किन इन्फेक्शन: हाथों से सीधे संक्रमण का खतरा।
- गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिजीज: नोट छूने के बाद बिना हाथ धोए खाना खाने पर पेट संबंधी बीमारियां।
- रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन: कुछ नोटों पर पाए गए फंगस सांस की नली पर असर डाल सकते हैं।
- एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया: रिसर्च में ऐसे बैक्टीरिया भी मिले जो आम दवाओं से कंट्रोल नहीं होते।
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विशेषज्ञों का मानना है कि करेंसी नोट संक्रमण फैलाने का सबसे आसान जरिया हैं क्योंकि वे हर दिन न जाने कितने हाथों से गुजरते हैं। समस्या यह है कि लोग नोटों को छूने के बाद तुरंत खाना खा लेते हैं या चेहरे को छू लेते हैं, जिससे बैक्टीरिया सीधे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर लगातार सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
रिसर्च का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नोटों के मटेरियल से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। चाहे नोट नए हों या पुराने, जैसे ही वे बाजार में आते हैं और लेन-देन का हिस्सा बनते हैं, उन पर बैक्टीरिया और फंगस जमना शुरू हो जाते हैं। इसलिए केवल नया नोट छपना समस्या का हल नहीं है।

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि सरकार को करेंसी नोटों की एक तय अवधि निर्धारित करनी चाहिए, जिसके बाद उन्हें बैंकिंग सिस्टम से हटा दिया जाए। इसके अलावा, नोटों के मटेरियल में एंटीबैक्टीरियल लेयर जोड़ने की दिशा में भी काम हो सकता है। हालांकि, फिलहाल सबसे बड़ा समाधान यही है कि लोग व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दें, ताकि नोटों की अदला-बदली कम हो।
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