संभल हिंसा पर आई रिपोर्ट, हिंदू आबादी 45% से घटकर 20%, दंगों की ज़िम्मेदारी किसकी?

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उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले ( Sambhal Violence Report) की जनसांख्यिकी (Demography) को लेकर एक गोपनीय रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक आज़ादी के बाद से लेकर अब तक इस क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

आज़ादी के समय जहां संभल नगर पालिका में लगभग 45% हिंदू रहते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 15% रह गई है। आयोग का कहना है कि वर्षों से चले आ रहे दंगों और तनावपूर्ण माहौल के कारण हिंदू समुदाय का लगातार पलायन हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा से ठीक पहले स्थानीय सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क ने नमाजियों को संबोधित करते हुए विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि “हम इस देश के मालिक हैं, मस्जिद थी, है और रहेगी, कयामत तक रहेगी।” आयोग का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी ने तनाव को और बढ़ाया।

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हिंसा के बाद बनी थी जांच समिति
संभल में नवंबर 2024 में मस्जिद सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया। आयोग में रिटायर्ड IAS अधिकारी अमित मोहन और पूर्व IPS अधिकारी अरविंद कुमार जैन शामिल थे। शनिवार सुबह आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी को सौंपी। रिपोर्ट को फिलहाल गोपनीय रखा गया है।

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रिपोर्ट के अहम निष्कर्ष सूत्रों के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।

  • हिंसा के दौरान विदेशी हथियार, जिन पर मेड इन USA लिखा था, बरामद हुए।
  • रिपोर्ट में ‘लव जिहाद’ और संगठित धर्मांतरण गतिविधियों का उल्लेख है।
  • आयोग का मानना है कि संभल की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि भीड़ को बाहर से बुलाकर सुनियोजित तरीके से दंगा कराया गया।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा गया कि 1947 से लेकर अब तक संभल में हर बड़े दंगे में हिंदू ही निशाने पर रहे।

आयोग पर प्रतिक्रियाएँ रिपोर्ट सामने आने के बाद अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएँ भी आने लगी हैं।

  • विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि आयोग ने जो तथ्य रखे हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। आज़ादी के बाद से हिंदुओं को कई बार निशाना बनाया गया, यही वजह है कि वे पलायन के लिए मजबूर हुए।

  • वहीं, मौलाना साजिद रशीदी ने इस रिपोर्ट को पक्षपाती बताया। उनका कहना है कि दंगों की वजह से हिंदुओं के पलायन की बात पूरी तरह से एकतरफ़ा है और इस तरह की रिपोर्ट से समाज में नफ़रत फैल सकती है।

क्या है संभल हिंसा?
संभल की हिंसा 24 नवंबर 2024 को उस समय भड़की थी, जब मस्जिद में सर्वेक्षण का दूसरा दौर शुरू हुआ। स्थानीय अदालत ने 19 नवंबर को यह सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद 1526 में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। पहले दिन का सर्वेक्षण शांतिपूर्ण रहा, लेकिन दूसरे सर्वेक्षण के दौरान झड़प शुरू हो गई। इस हिंसा में कम से कम पांच लोगों की जान गई थी।

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