भारत विकास परिषद संगम शाखा ने बढ़ाई सामूहिक विवाह आवेदन की अंतिम तिथि

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– 10 सितंबर तक लिए जाएंगे आवेदन, अधिक से अधिक जोड़ों की शादी कराने का परिषद का लक्ष्य
हनुमानगढ़। भारत विकास परिषद शाखा हनुमानगढ़ संगम की कार्यकारिणी की बैठक अध्यक्ष महेश जसूजा के कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में आगामी सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। परिषद के पास अब तक 13 जोड़ों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। कार्यकारिणी द्वारा विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया गया कि सामूहिक विवाह के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 सितंबर 2025 तक कर दिया जाए। इस निर्णय के साथ ही परिषद ने समाज में अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर देने का संकल्प भी लिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए परिषद अध्यक्ष महेश जसूजा ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे इस पुनीत कार्य के प्रचार-प्रसार में तेजी लाएं ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह न केवल सामाजिक समरसता का प्रतीक है बल्कि यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत भी है।
कोषाध्यक्ष प्रदीप मित्तल ने बैठक में बताया कि समाज में कन्याओं की कमी के चलते आवेदन अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिषद का उद्देश्य अधिक से अधिक कन्याओं का विवाह संपन्न कराना है ताकि उन्हें सामाजिक सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिल सके। परिषद का पूरा प्रयास रहेगा कि योग्य जोड़ों को सामूहिक विवाह के माध्यम से वैवाहिक जीवन का नया आरंभ कराया जा सके।
बैठक में सचिव आशीष सक्सेना, अरुण अग्रवाल, अंकुर मुंजाल, अमित गुप्ता, राजेंद्र कासनियां, परविंदर पुरवा, नरेश मेहन, विजय मित्तल और सुरेंद्र गाड़ी सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे। सभी ने सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और अन्य संस्थाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों से सहयोग की अपील करने का संकल्प लिया।
निर्णय लिया गया कि 10 सितंबर 2025 तक प्राप्त सभी आवेदन पत्रों की परिषद द्वारा गहन जांच-पड़ताल की जाएगी। निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले जोड़ों का चयन कर परिषद सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन करेगी। परिषद की यह पहल न केवल समाज में एकजुटता को मजबूत करेगी बल्कि जरूरतमंद परिवारों को जीवनभर याद रहने वाला संबल भी प्रदान करेगी।
भारत विकास परिषद समय-समय पर समाज सेवा के विभिन्न कार्यों में अग्रणी रही है। सामूहिक विवाह कार्यक्रम भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है। परिषद का मानना है कि सामूहिक विवाह से न केवल आर्थिक बोझ कम होता है बल्कि समाज में सहयोग और सेवा भाव को भी बल मिलता है। मीटिंग के अंत में सभी सदस्यों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

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