नेपाल में तख्तापलट करने वाला Gen Z प्रोटेस्ट इन 2 मास्टरमाइंड ने करवाया, जानें कौन हैं ये?

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नेपाल में जेन-ज़ी प्रोटेस्ट (Gen-Z Protests Nepal) का तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे सत्ता परिवर्तन तक पहुँच गया है। दूसरे दिन हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है।

लेकिन हर पिक्चर का एक डायरेक्टर निर्माता जरुर होता है। जैसा कि नेपाल की सत्ता परिवर्तन तस्वीर में भी है। यहां दो लोगों के नाम चर्चा में है। सुडान गुरुंग और बालेन्द्र शाह। जिन्हें नेपाल में GenZ प्रोटेस्ट करवाने के पीछे के चेहरे माने जा रहे हैं। जिन्होंने खुद भी सोशल मीडिया पर ये कबूल किया है।

अब तक की रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस विरोध प्रदर्शन में कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं। हालात ऐसे बने कि पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और वित्त मंत्री बिष्णु प्रसाद पौडेल तक भीड़ के गुस्से का शिकार हो गए। दोनों को लोगों ने सरेआम पीटा और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई मंत्री और नेता जान बचाकर भागते नजर आए, जबकि उनके घरों और दफ्तरों को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया।

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कौन है सुडान गुरुंग और बालेन्द्र शाह
सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस राजनीतिक भूचाल के पीछे mastermind कौन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे आंदोलन की रीढ़ सुदन गुरुंग नाम का शख्स हैं।

कौन हैं सुडान गुरुंग?

  • ‘हामी नेपाल’ NGO के संस्थापक और अध्यक्ष: 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद बने इस यूथ-आधारित संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं।
  • व्यक्तिगत त्रासदी: भूकंप में अपने बच्चे को खोने के बाद उन्होंने जिंदगी की दिशा बदल दी और समाजसेवा में लग गए।
  • पार्टी प्लानर से एक्टिविस्ट: पहले इवेंट मैनेजमेंट करते थे, फिर आपदा राहत और युवाओं को जोड़ने वाले कामों में जुट गए।
  • पहले भी लीडरशिप दिखाई: धरान के ‘घोपा कैंप’ आंदोलन और हेल्थ सेक्टर में पारदर्शिता की मांग जैसे प्रोटेस्ट में अहम भूमिका निभाई।
  • Gen Z की आवाज: डिजिटल दौर की नाराजगी को संगठित कर शांतिपूर्ण विरोध के रूप में पेश किया।

कैसे शुरू हुआ ये आंदोलन?
सुडान गुरुंग के नेतृत्व में उनके NGO ‘हामी नेपाल’ ने सोशल मीडिया पर युवाओं को विरोध के लिए तैयार किया। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रैली के रूट और सेफ्टी गाइडलाइन्स तक शेयर की गईं। छात्रों से अपील की गई कि वे स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर और किताबें लेकर आएं ताकि यह विरोध ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ के रूप में दिखे।

लेकिन जब सोशल मीडिया पर बैन बढ़ा और सरकार ने कठोर कदम उठाए, तो प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। देखते ही देखते यह आंदोलन देश की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने वाला बन गया।

कौन है दूसरा चेहरा बालेन्द्र शाह
नेपाल की मौजूदा राजनीति में अगर किसी युवा नेता का नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, तो वह हैं बालेन्द्र शाह, जिन्हें लोग प्यार से “Balen” भी कहते हैं। शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को हुआ और वे पेशे से एक रैपर, सिविल इंजीनियर और अब स्वतंत्र राजनीतिज्ञ हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने म्यूजिक और सोशल एक्टिविज़्म के जरिए अपनी पहचान बनाई। उनके गानों में भ्रष्टाचार, सिस्टम की खामियों और समाज की समस्याओं का जिक्र होता था, जिसने युवाओं के बीच उन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया।

बालेन्द्र शाह ने 2022 में पारंपरिक राजनीतिक दलों को चुनौती देते हुए काठमांडू महानगरपालिका के मेयर पद का चुनाव लड़ा। किसी बड़े राजनीतिक दल का समर्थन न होने के बावजूद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उनकी जीत को नेपाल की राजनीति में बदलाव की आहट माना गया।

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मेयर बनने के बाद बालेन्द्र शाह ने अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए। कई जगहों पर उन्होंने खुद जाकर बुलडोज़र कार्रवाई करवाई, जिससे जनता ने उन्हें एक सख्त और ईमानदार नेता के रूप में देखना शुरू किया। उनकी यह छवि युवाओं में और ज्यादा मजबूत होती गई।

आज बालेन्द्र शाह सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेपाल के युवाओं के लिए वह परिवर्तन और उम्मीद का प्रतीक बन चुके हैं। मौजूदा जेन-ज़ी प्रोटेस्ट और राजनीतिक संकट के दौर में भी शाह की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्हें नेपाल की उस नई पीढ़ी के नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देकर बदलाव की दिशा तय कर सकती है।