ट्रम्प का नया फैसला, शनिवार तक लौटिए अमेरिका, नहीं तो H-1B Visa के लिए देने होंगे इतने पैसे?

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फैसले से 3 लाख से ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स प्रभावित होंगे। साल 2023 में H-1B वीजा लेने वालों में 1.91 लाख भारतीय थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2.07 लाख पहुंच गया।

478

अमेरिका में अब H-1B वीजा ( H-1B Visa) लेना बेहद महंगा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को व्हाइट हाउस में आदेश पर साइन कर दिए हैं। नए नियम के तहत H-1B वीजा के लिए अब हर साल एक लाख डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए एप्लिकेशन फीस देनी होगी। यह फीस नए आवेदनों के साथ-साथ मौजूदा वीजा धारकों के नवीनीकरण पर भी लागू होगी।

यह नियम 21 सितंबर 2025 से लागू होगा और शुरुआती तौर पर 12 महीनों तक प्रभावी रहेगा। कंपनियों को फीस भुगतान का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। यदि भुगतान नहीं किया गया, तो अमेरिकी राज्य विभाग या होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) याचिका रद्द कर देगा। रॉयटर्स के मुताबिक बाहर रहने वाले कर्मचारियों को सलाह दी कि वे शनिवार रात से पहले वापस आ जाएं।

पहले H-1B वीजा की लागत औसतन 5 लाख रुपए थी और यह 3 साल के लिए वैध होता था। इसे आगे 3 साल के लिए रिन्यू भी किया जा सकता था। लेकिन अब 6 साल की अवधि में कुल खर्च 5.28 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा, जो पहले के मुकाबले 50 गुना ज्यादा है।

ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा एजेंडा जिससे लाखों भारतीयों पर मंडराया खतरा, जानें क्या पूरा मामला?

ट्रम्प ने लॉन्च किए नए वीजा कार्ड
H-1B वीजा फीस बढ़ाने के साथ ही अमेरिका ने तीन नए वीजा कार्ड भी पेश किए हैं। इनमें ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड’ शामिल हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड, जिसकी कीमत 8.8 करोड़ रुपए होगी, धारक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देगा।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

भारतीयों पर होगा बड़ा असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फैसले से 3 लाख से ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स प्रभावित होंगे। साल 2023 में H-1B वीजा लेने वालों में 1.91 लाख भारतीय थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2.07 लाख पहुंच गया। अब ऊंची फीस के कारण भारत की आईटी और टेक कंपनियों के लिए कर्मचारियों को अमेरिका भेजना महंगा साबित होगा।

71% H-1B वीजा धारक भारतीय हैं। नई फीस मिड-लेवल और एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ डाल सकती है। इससे कंपनियां नौकरियां आउटसोर्स करने लगेंगी, और अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के अवसर घट सकते हैं।

सबसे ज्यादा वीजा स्पॉन्सर करने वाली कंपनियां
इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी भारतीय कंपनियां हर साल सबसे ज्यादा H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब महंगी फीस के चलते भारतीय टैलेंट का रुख यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट की ओर हो सकता है।

चैनल को सब्सक्राइब करें

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।