हनुमानजी द्वारा संजीवनी बूटी प्रसंग ने किया भावविभोर
हनुमानगढ़। श्रीरामलीला समिति द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामलीला महोत्सव के 12वें दिन अंगद-रावण संवाद तथा लक्ष्मण मूर्छा एवं हनुमानजी द्वारा संजीवनी बूटी लाने की लीलाओं का शानदार मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री सुन्दरकाण्ड मित्र मंडल द्वारा बालाजी की आरती व हनुमान चालीसा के पाठ के साथ हुई। मंचन देखने पहुंचे अतिथियों ने कहा कि किसी भी क्षेत्र या गांव में भगवान की लीलाओं का मंचन होना प्रभु कृपा और संयोग का परिणाम है। यह लीलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाली शिक्षा का माध्यम भी हैं।
रामलीला में दर्शाया गया कि अहंकारी रावण ने संधि प्रस्ताव ठुकराकर अपने ही भाई विभीषण को लंका से निष्कासित कर दिया। इसके बाद श्रीराम ने वानर युवराज अंगद को शांति दूत बनाकर रावण के पास भेजा। किंतु अहंकार में डूबा रावण अंगद के पैर तक न हिला सका और अंततः प्रस्ताव ठुकरा दिया। अंगद का संवाद और उनका साहस दर्शकों को अत्यंत प्रभावित कर गया। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध दृश्य का मंचन हुआ, जिसमें मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। यह दृश्य देखकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा। इसके आगे हनुमानजी के संजीवनी बूटी लेकर आने तक का प्रसंग मंचित किया गया। दर्शकों ने इस अद्भुत दृश्य का आनंद लेते हुए ‘जय बजरंगबली’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया। समिति सचिव दिनेश तलवाड़िया ने बताया कि 1965 से अशोक वाटिका के मंचन में प्रयुक्त होने वाले फल लगातार समिति के कोषाध्यक्ष सतीश गर्ग के परिवार की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं। समिति अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल तलवाड़िया ने कहा कि कलाकार पूरी मर्यादा और समर्पण से रामलीला का मंचन कर रहे हैं। समिति अध्यक्ष ने बताया कि आगामी 2 अक्टूबर को दशहरा ग्राउंड, बाईपास हनुमानगढ़ टाउन में भव्य दशहरा उत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए रावण, मेघनाथ और कुम्भकरण के विशाल पुतले तैयार किए जा चुके हैं। इस अवसर पर समिति संरक्षक बालकृष्ण गोल्याण, अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल, सचिव दिनेश तलवाड़िया, कोषाध्यक्ष सतीश गर्ग, उपाध्यक्ष सज्जन बंसल, बालकिशन खदरीया, डायरेक्टर प्रेम रतन पारीक, उप-डायरेक्टर अशोक मिड्ढा व बहादुर सिंह चौहान सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। मंच का संचालन प्रह्लाद गुप्ता ने किया। हनुमानगढ़ की यह रामलीला पिछले 65 वर्षों से लगातार समाज को संस्कृति और आस्था से जोड़ रही है। दर्शक इन लीलाओं से केवल आनंद ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी ग्रहण करते हैं।
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