‘अब की बार, मोदी सरकार’ लिखने वाले पीयूष पांडे नहीं रहे, भारत की पहचान बन गए उनके ये 5 ऐड्स

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भारतीय विज्ञापन जगत को एक बड़ा झटका लगा है। विज्ञापन गुरु पद्मश्री पीयूष पांडे (Piyush Pandey) का गुरुवार को निधन हो गया। 70 साल की उम्र में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। पीयूष ने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारा लिखा था। इसके अलावा, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गाना लिखा था। उनके निधन के साथ भारतीय विज्ञापन की एक सुनहरी कहानी का अंत हो गया। एक ऐसा दौर, जिसने भारत की भाषा, संस्कृति और भावनाओं को विज्ञापन की दुनिया में नई पहचान दी।

पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम ने X पर लिखा, ‘पीयूष पांडे क्रिएटिविटी के लिए जाने जाते थे। एडवर्टाइजिंग की दुनिया में उन्होंने शानदार योगदान दिया। मैं उनके साथ हुई बातचीत को सालों तक संजोकर रखूंगा। उनके दुनिया से जाने से बहुत दुखी हूं। उनके परिजन के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

क्रिकेट से ऐड गुरु बनने तक का सफर
जयपुर में 1955 में जन्मे पीयूष पांडे ने अपने करियर की शुरुआत क्रिकेट से की थी। वह रणजी ट्रॉफी में राजस्थान के लिए खेल चुके थे। लेकिन असली पहचान उन्हें 1982 में ओगिल्वी एंड माथर (Ogilvy) में जॉइन करने के बाद मिली। उन्होंने भारतीय विज्ञापनों में ‘हिंग्लिश’ और लोकभाषा का ऐसा तड़का लगाया कि वह आम लोगों के दिलों में उतर गए।

भारत की पहचान बन गए उनके ऐड्स
पीयूष पांडे ने ऐसे कई विज्ञापन बनाए जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं —

  • फेविकॉल: “फेविकॉल का मज़बूत जोड़, टूटेगा नहीं।”
  • कैडबरी: “कुछ खास है हम सभी में।”
  • एशियन पेंट्स: “हर घर कुछ कहता है।”
  • सर्फ एक्सेल: “दाग अच्छे हैं।”
  • और राजनीति की दुनिया में सबसे चर्चित लाइन — “अब की बार, मोदी सरकार।”

इन विज्ञापनों ने न सिर्फ़ ब्रांड्स को नई पहचान दी, बल्कि देश के हर कोने में लोगों की भावनाओं को छुआ।

पुरस्कार और सम्मान
पीयूष पांडे को 2016 में भारत सरकार की ओर से पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2024 में उन्हें LIA Legend Award भी मिला। वह ऐसे पहले एशियाई विज्ञापन विशेषज्ञ थे जिन्हें ब्रिटिश मैगजीन Campaign ने “एशिया का सबसे प्रभावशाली ऐडमैन” कहा था।

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एक युग का अंत
पीयूष पांडे ने दिखाया कि किसी भी ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत उसकी “मानवीय कहानी” होती है। उन्होंने यह साबित किया कि एक विज्ञापन सिर्फ़ बिकने वाला संदेश नहीं, बल्कि महसूस की जाने वाली भावना हो सकता है। उनके जाने से भारतीय विज्ञापन जगत ने सिर्फ़ एक क्रिएटिव लीडर नहीं, बल्कि एक युग खो दिया है। वह युग जिसमें “हर ऐड, एक कहानी कहता था।”

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