श्रीरामकथा के छठे दिन भक्ति का माहौल चरम पर

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– राम वनवास, दशरथ मरण और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
हनुमानगढ़।
 गौशाला परिसर स्थित कामधेनु सत्संग भवन में चल रही दिव्य श्रीरामकथा का आध्यात्मिक प्रभाव प्रत्येक दिन और प्रखर होता जा रहा है। स्वर्गीय दुलारी देवी सर्राफ व स्वर्गीय चंदूलाल सर्राफ की पावन स्मृति में उनके पुत्र पंकज सर्राफ द्वारा आयोजित इस कथा महोत्सव के छठे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सम्पूर्ण परिसर भक्ति, भजन, रामनाम और अध्यात्म की अनुभूति से सराबोर दिखाई दिया। बाल संत श्री भोलेबाबा जी महाराज की दिव्य उपस्थिति में आज की कथा अत्यंत भावपूर्ण, मार्मिक व शिक्षाप्रद रूप में सम्पन्न हुई।
महाराज श्री ने आज के दिवस पर रामकथा के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग—राम वनवास, महाराज दशरथ मरण तथा केवट प्रसंग—का वृहद व हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महारानी कैकेयी के दो वरदानों के कारण भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा। महाराज श्री ने कहा कि राम का वनवास त्याग, मर्यादा और पिता के वचन की रक्षा की अद्भुत मिसाल है। जब राम वनवास के लिए तैयार हुए तो संपूर्ण अयोध्या शोक से भर उठी। यह प्रसंग सुनते ही सत्संग भवन में सन्नाटा पसर गया और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
इसके पश्चात महाराज श्री ने राजा दशरथ के विरह-वेदनापूर्ण मृत्यु प्रसंग का अत्यंत भावुक वर्णन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम के वियोग ने राजा दशरथ को तोड़ दिया और अंततः वे पुत्र-शोक में ही इस नश्वर संसार को त्याग गए। प्रसंग का वर्णन इतना मार्मिक था कि उपस्थित श्रद्धालुओं के भाव आत्मीयता से प्रवाहित हो उठे। “राम-राम” के जाप के बीच हर हृदय में दशरथ की पीड़ा प्रतिध्वनित होती रही।
आज की कथा का प्रमुख आकर्षण केवट प्रसंग रहा। महाराज श्री ने बताया कि प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के गंगा तट पहुँचने पर अहोभाग्यशाली केवट ने किस प्रकार भगवान के चरण पखारने का आग्रह किया। केवट का यह प्रेम, समर्पण और भक्ति का अनुपम उदाहरण सुनकर माहौल “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंज उठा। महाराज श्री ने कहा कि केवट भक्ति का प्रतीक है, जो भगवान को राजा नहीं, अपना अतिथि मानकर उनके चरणों में अटूट प्रेम उड़ेल देता है। कथा के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को विनम्रता, करुणा और निष्काम सेवा का संदेश दिया।
आज की कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान पंकज सर्राफ ने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कर किया। आयोजन समिति के मनोहरलाल बंसल ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे राधा नाम प्रभात फेरी निकाली जा रही है, जिसमें हैप्पी बत्रा, कृष्ण मिड्ढा, प्रदीप सेतिया, अमित, ओम सोनी सहित अनेक सदस्य भाग ले रहे हैं।

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