-भरत मिलाप प्रसंग के भावपूर्ण वर्णन से सत्संग भवन गूंज उठा ‘जय श्रीराम’ के उद्घोषों से
हनुमानगढ़। गौशाला परिसर स्थित कामधेनु सत्संग भवन में आयोजित दिव्य श्रीरामकथा के सातवें दिन आध्यात्मिकता, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वर्गीय दुलारी देवी सर्राफ एवं स्वर्गीय चंदूलाल सर्राफ की स्मृति में उनके पुत्र पंकज सर्राफ द्वारा आयोजित इस पावन कथा में रविवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। संपूर्ण परिसर दीपों, पुष्पों और रामनाम के जप से ऐसा पवित्र बना हुआ था मानो अयोध्या स्वयं यहां विराजमान हो। बाल संत श्री भोले बाबा जी महाराज की दिव्य उपस्थिति में आज की कथा अत्यंत भावनात्मक और हृदयस्पर्शी रूप में संपन्न हुई।
सातवें दिवस की कथा का मुख्य केंद्र रहा भरत मिलाप का ऐतिहासिक एवं मार्मिक प्रसंग। महाराज श्री ने रमणीय शैली में बताया कि किस प्रकार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम से भरत का मिलन भारतीय संस्कृति में प्रेम, त्याग और भ्रातृ-भाव का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब भरत को ज्ञात हुआ कि राम वनवास में हैं, तो वे एक क्षण भी अयोध्या में नहीं रुके। नंदिग्राम से लेकर चित्रकूट तक की यात्रा उनके हृदय की बेचैनी और राम के प्रति उनके समर्पण की गाथा कहती है।
महाराज श्री ने बताया कि जब भरत और राम का आमना-सामना हुआ, वह दृश्य इतना दिव्य था कि देवतागण भी अपूर्व आनंद से अभिभूत हो उठे। दोनों भाइयों का परस्पर प्रेम और उनके चरणों में उमड़ा भाव इतना अद्भुत था कि सत्संग भवन में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें स्वतः नम हो गईं। इस प्रसंग के वर्णन के दौरान लगातार “जय श्रीराम” और “भरत-राम की जय” के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। महाराज श्री ने कहा कि भरत मिलाप केवल कथा का प्रसंग नहीं, बल्कि वह संस्कार है जो बताता है कि परिवार का प्रेम किसी भी ताज-तिलक से बड़ा होता है। भरत का त्याग और उनकी निष्ठा दुनिया के सामने आदर्श के रूप में स्थापित है।
कथा के शुभारंभ में मुख्य यजमान पंकज सर्राफ ने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीराम की आराधना की। आयोजन समिति के मनोहरलाल बंसल ने बताया कि प्रतिदिन की भांति आज भी सुबह 6 बजे राधा नाम प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें हैप्पी बत्रा, कृष्ण मिड्ढा, प्रदीप सेतिया, अमित, ओम सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह दिव्य श्रीरामकथा 20 नवंबर तक प्रतिदिन चलेगी तथा 21 नवंबर को हवन-पूजन, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ इसका भव्य समापन होगा। सर्राफ परिवार सहित नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
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