– संघर्ष समिति ने दी चेतावनी—मांगें नहीं मानी गईं तो होगा आमरण अनशन
हनुमानगढ़। धाणका जनजाति संघर्ष समिति द्वारा पिछले 110 दिनों से जिला कलेक्ट्रेट के सामने जारी शांतिपूर्ण धरना अब निर्णायक रूप लेता दिखाई दे रहा है। अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत धाणका जाति के प्रमाण-पत्र नहीं बनाए जाने और ऑनलाइन आवेदनकर्ताओं को लगातार आपत्तियाँ लगाकर प्रक्रिया में नहीं लाए जाने के विरोध में समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए आमरण अनशन की चेतावनी दी है। संघर्ष समिति ने इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री महोदय, राजस्थान सरकार जयपुर को जिला कलेक्टर मार्फत ज्ञापन सौंपकर अविलंब कार्रवाई की मांग की है।
समिति का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार का लिखित आदेश मौजूद नहीं है, फिर भी धाणका समाज के लोगों के जाति प्रमाण-पत्र जानबूझकर रोके जा रहे हैं। पहले से प्रस्तुत आवेदनों पर भी अनावश्यक आपत्तियाँ लगाकर उन्हें लंबित रखा जा रहा है, जिससे समाज के गरीब, मजदूर एवं जरूरतमंद परिवारों को गंभीर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने आरोप लगाया कि शासन स्तर पर पहले ही गठित की गई कमेटी को सभी आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट सौंप दिए गए थे, लेकिन उसके बावजूद मामले में कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि धाणका समाज ने वर्षों से राजनीतिक, सामाजिक और गैर राजनैतिक मंचों पर उल्लेखनीय योगदान दिया है, परंतु आज उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। संविधान दिवस के अवसर पर अधिकारों के इस खुले उल्लंघन ने समाज में गहरा आक्रोश पैदा किया है। समिति का आरोप है कि प्रशासन की हठधर्मिता ने समाज को कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।
समिति ने साफ कहा कि यदि आने वाले एक सप्ताह के भीतर धाणका जाति के प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाते या प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शुरू नहीं किया जाता, तो संघर्ष समिति के सदस्य कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन प्रारंभ करेंगे। यह कदम सरकार और प्रशासन को चेतावनी देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है।
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