भेदभाव…

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ऐ मनुष्य तू क्यों भेदभाव करता है ?
अमीरी गरीबी, जाति पाती,
सब तेरा ही तो बनाया हुआ है
फिर तू क्यों भेद भाव करता है?
जहाँ अमीर को सरकारी नौकरी
और गरीबों का हक छीना जाता है
ये सब तू ही तो करवाता है
फिर तू क्यों भेद भाव करता है ?
जहाँ गोरे रंग को खूबसूरती का प्रतीक
माना जाता है
और काले रंग को अपशकुन का
ये सब तूने ही तो बनाया है
फिर क्यों तू भेद भाव करता है ?
जहाँ कुछ जातियों को बेहद तवज्जो
दी जाती है
और कुछ को समाज से ही नकार
दिया जाता है
ये सब तू ही तो करता है ” ए मनुष्य ! ”
फिर क्यों तू भेद भाव करता है ?

©अन्शिका

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