रजनीश गंगवार की ‘कांवड़’ कविता से कैसे मचा उत्तरप्रदेश में विवाद, देखें VIDEO

रजनीश गंगवार का बयान एक ऐसे समय में आया है जब धार्मिक आस्था, शिक्षा और विचार की स्वतंत्रता को लेकर समाज पहले से ही संवेदनशील है।

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उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले के बहेड़ी कस्बे में एमजीएम इंटर कॉलेज के एक शिक्षक रजनीश गंगवार (Rajneesh Gangwar) का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में वह स्कूली असेंबली के दौरान सैकड़ों छात्रों के सामने माइक पर एक विवादास्पद कविता गाते नजर आ रहे हैं। गीत की सामग्री में धार्मिक रंग और भड़काऊ संदेश होने का आरोप है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है।

गंगवार की कविता को लेकर हंगामे पर पुलिस का बयान सामने आया है। बहेड़ी के क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार ने कहा, एमजीएम इंटर कॉलेज में शिक्षक रजनीश गंगवार ने कॉलेज प्रांगण में छात्रों को इकट्ठा कर कविता पाठ के माध्यम से कांवड़ यात्रा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। थाने में तहरीर मिली है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है।

क्या है वीडियो में?
वायरल वीडियो में शिक्षक रजनीश गंगवार यह कहते सुने जा सकते हैं कि “कावड़ लेकर चलना अब धर्म नहीं, झूठ है”, और इसके बजाय छात्रों को शिक्षा पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। गीत के बोलों में धर्म और सामाजिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की गई है। यह घटना स्कूल की सुबह की असेंबली के दौरान रिकॉर्ड की गई, जहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।

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कौन हैं रजनीश गंगवार?
रजनीश गंगवार एमजीएम इंटर कॉलेज में हिंदी के प्रवक्ता हैं। साथ ही NSS कार्यक्रम अधिकारी भी हैं। उनकी कविता को लेकर अब हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। गंगवार ने कहा, मैं एमजीएम इंटर कॉलेज बहेड़ी में स्थायी रूप से अध्यापन कार्य कर रहा हूं। मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में पीएचडी हूं। मेरे समय-समय पर कविताएं एवं लेख आकाशवाणी, दूरदर्शन और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।

शिक्षा विभाग ने मांगा टीचर से जवाब
जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले का संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। एमजीएम इंटर कॉलेज के प्रबंध तंत्र ने भी बयान जारी कर कहा है कि स्कूल के मंच का राजनीतिक या धार्मिक प्रचार के लिए इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है, और शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस प्रकरण पर बहेड़ी और बरेली में समाज दो धाराओं में बंटता दिख रहा है। एक वर्ग शिक्षक के विचारों को ‘वैज्ञानिक सोच’ बताकर समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे छात्रों के धार्मिक विश्वासों पर हमला मान रहा है। सोशल मीडिया पर यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या एक शिक्षक को छात्रों के बीच इस तरह के विचार प्रकट करने चाहिए?

वहीं, दूसरी ओर रजनीश कविता पर बढ़ते विवाद पर सफाई दी है, उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझसे ईर्ष्या-द्वेष के चलते झूठे आरोप लगाकर मुझे बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मकसद केवल छात्र-छात्राओं को शिक्षा और उनके जीवन के उद्देश्यों के प्रति जागरूक करना है। मैं किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं चाहता।

 

 

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रजनीश गंगवार का बयान एक ऐसे समय में आया है जब धार्मिक आस्था, शिक्षा और विचार की स्वतंत्रता को लेकर समाज पहले से ही संवेदनशील है। यह मामला महज़ एक शिक्षक का निजी विचार नहीं रहा, बल्कि एक व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है — कि विद्यालय परिसर वैचारिक प्रयोगशाला है या धार्मिक तटस्थता का क्षेत्र? आगे प्रशासन क्या कदम उठाता है और समाज इस पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि इस एक वीडियो ने शिक्षण, धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।

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