इन वजहों से 2 दशक से अटकी थी भारत-EU ट्रेड डील, जानें किस देश को होंगे क्या फायदे?

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लगभग दो दशकों तक रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (India-EU Trade Deal ) एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते का ऐलान हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के मंच से भारत और यूरोपीय संघ (India-EU Free Trade Agreement) के बीच हुए बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की औपचारिक घोषणा की।

भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही अमेरिका की ओर से बन रहे आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के बीच दुनिया के अन्य देशों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

दो दशकों से क्यों अटकी हुई थी डील?
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील को लेकर जून 2007 में बातचीत शुरू हुई। तब इसे व्यापक व्यापार और निवेश समझौता यानी BTIA कहा गया। तब भारत की तरफ से इसकी अगुआई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे थे। 15 दौर की बैठक हुई, लेकिन 2013 में BTIA की बातचीत पूरी तरह थम गई। EU चाहता था कि उसके 95% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर टैरिफ खत्म किया जाए, जबकि भारत सिर्फ 90% तक ही तैयार था।

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जून-जुलाई 2022 में भारत-EU के बीच FTA की बात दोबारा शुरू हुई। तब से लेकर अक्टूबर 2025 तक दोनों पक्षों के अधिकारियों ने 14 मीटिंग्स की। इन बैठकों में 2007 से 2013 तक तय हुए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ये तय हुआ कि…

  • 90% से ज्यादा सामान पर टैरिफ खत्म करने की प्लानिंग होगी। ये सबकुछ 5 से 10 साल में स्टेप बाय स्टेप लागू होगा।
  • कृषि, डेयरी, ऑटो, शराब जैसे सेक्टर्स पर कोटा या धीरे-धीरे टैरिफ में कटौती होगी। शुरुआती दौर में इन्हें काफी हद तक सुरक्षित रखा जाएगा। भारत पहले भी इस पर अड़ा था।

भारत-EU की ट्रेड डील से यूरोपियन यूनियन के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा…

भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी: ट्रेड डील के बाद यूरोप से भारत में आने वाली वाइन, स्पिरिट्स और अन्य एल्कोहॉलिक ड्रिंक्स पर टैरिफ कम हो सकता है। अभी इन पर 150 से 200% तक ड्यूटी लगती है। इसके घटने से भारत में ये प्रोडक्ट सस्ते हो सकते हैं। यानी भारत में डिमांड बढ़ेगी, जिससे यूरोप में ज्यादा शराब बनेगी।

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भारत में यूरोपीय कारों की डिमांड बढ़ेगी

  • यूरोपीय कार मैन्युफैक्चरर्स, खासकर प्रीमियम सेगमेंट की कंपनियां जैसे BMW, मर्सडीज, पॉर्श वगैरह को भारत में एंट्री आसानी से मिलेगी।
  • सरकार अभी इन पर 110% टैरिफ लगाती है। डील के बाद से घटकर 40% हो सकता है।
  • रॉयटर्स के मुताबिक, भारतीय सरकार ने तुरंत से कुछ चुनिंदा यूरोप में बनी कारों पर टैरिफ घटाने पर सहमति जताई है। ये कारें 15,000 यूरो (16.3 लाख रुपए) से ज्यादा कीमत की होंगी। आगे चलकर इन कारों पर लगने वाला टैरिफ 10% तक आ सकता है।

इसके अलावा यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलीकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा।

क्या होते हैं यूरोपीय संघ?
यूरोपीय संघ (European Union – EU) यूरोप के देशों का एक समूह है, जो आपस में मिलकर काम करता है। इसे इसलिए बनाया गया ताकि देश मिलकर व्यापार करें, एक-दूसरे की मदद करें और शांति व विकास बनाए रखें। यूरोपीय संघ के देश कई मामलों में मिलकर फैसले लेते हैं, जैसे व्यापार, पर्यावरण, यात्रा और अर्थव्यवस्था। इन देशों के बीच सामान खरीदना-बेचना और लोगों का आना-जाना काफी आसान होता है। आज यूरोपीय संघ दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में से एक है।

यूरोपीय संघ में कुल 27 देश शामिल हैं। ये देश हैं-
ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड्स, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन।

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