भारत–यूरोप डील से कितना होगा फायदा? यहां जानें एक-एक पॉइंट

इस समझौते को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है। इस डील के बाद भारत में यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।

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18 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ट्रेड डील (India EU Free Trade Deal) हो गई है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस समझौते को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है। इस डील के बाद भारत में यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।

इसके अलावा भारत में यूरोप से आने वाली शराब और वाइन पर टैक्स कम हो सकता है। यूरोपीय देशों की शराब पर अभी 150% टैरिफ लगता है। इसे घटाकर 20–30% किया जाएगा।

भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि EU दूसरी सबसे बड़ी। दोनों मिलकर वैश्विक GDP का करीब 25% और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं।

यूरोपियन यूनियन के भारत का कारोबार कितना बड़ा? 
अगर आंकड़ों को देखें तो साल 2024-24 में यूरोपियन यूनियन के भारत का कारोबार 136.53 बिलियन डॉलर (तकरीबन 12 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार था। इसमें निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। यानी भारत में बनने वाली चीजों के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूरोप के देश ही हैं।

अगर सिर्फ सर्विस सेक्टर की बात करें तो साल 2024 में भारत ने यूरोपियन यूनियन के साथ 83.10 बिलियन डॉलर का कारोबार किया। मुख्य रूप से इसमें टेलीकम्युनिकेशन और आईटी सर्विसेज शामिल थीं। भारत दुनियाभर में जितना निर्यात करता है, उसमें से 17 प्रतिशत निर्यात यूरोपियन यूनियन के देशों में होता है।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of all deals) क्या है?
जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है।

बीते 4 साल में भारत 7 FTA साइन कर चुका है, जिसमें यूके, ओमान, न्यूजीलैंड शामिल हैं। अब 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन के साथ भी FTA की घोषणा हो सकती है। भारत-EU के बीच होने वाली ट्रेड डील 3 बड़ी वजहों से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कही जा रही है…

  • EU 27 देशों का ग्रुप और दुनिया की सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक है। वहीं भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है। दोनों के साथ आने से 200 करोड़ लोगों का मार्केट बनेगा। साथ ही दुनिया की 25% GDP को कवर करेगा।
  • मौजूदा वैश्विक उठापटक के बीच दुनिया अमेरिका और चीन का ऑप्शन खोज रही हैं। भारत-EU के बीच ये डील होने से ग्लोबल सप्लाई चेन का चेहरा बदल जाएगा। उम्मीद है कि चीन की जगह भारत तेजी से प्रोडक्शन हब बनेगा। EU से ट्रेड बढ़ेगा और ट्रम्प के टैरिफ को मात दी जाएगी।
  • भारत-EU ने पिछले साल 12.5 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया। FTA आने से भारत की बर्लिन, रोम, म्यूनिख जैसे यूरोपीय बाजारों में और यूरोप की  दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे भारतीय बाजारों में पहुंच बन जाएगी। अनुमान है कि FTA होने से भारत-EU का व्यापार जल्द ही दोगुना हो जाएगा।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारत को क्या फायदा होगा?
भारत ने 2025 में EU देशों को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं, EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा…

यूरोप में भारतीय कपड़े ज्यादा बिकेंगे: भारत के कपड़े और चमड़े पर EU अभी 10% ड्यूटी लगाता है। FTA के बाद यह कम या खत्म हो सकती है। इससे यूरोप में भारतीय कपड़े, जूते सस्ते होंगे और उनकी डिमांड बढ़ेगी। इससे भारत में गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर जैसी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को सीधा फायदा होगा।

भारत में लग सकती हैं यूरोप की डिफेंस फैक्ट्रियां: फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे EU देश भारत को एडवांस्ड वेपन बेचते हैं। 2024 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन डेढ़ लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं डिफेंस एक्सपोर्ट 25 हजार करोड़ रुपए रहा।

  • EU से FTA होने के बाद भारत को डिफेंस सप्लायर और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के बनाया जा सकता है। इससे इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
  • इसके अलावा भारत की हथियार कंपनियों को EU की डिफेंस जरूरतें पूरी करने वाले SAFE फंड्स की पहुंच मिल सकती है। ऐसा होने से यूरोप में भारतीय फैक्ट्रियां लग सकती है।

20% बढ़ सकता है फार्मा और केमिकल ट्रेड: इस डील की वजह से फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स सेक्टर में भारत को हर साल 20-30% के ट्रेड का फायदा हो सकता है। रेगुलेटरी अप्रूवल आसान होने और स्टैंडर्ड एक जैसे होने से भारत में बनने वाली जेनेरिक दवाएं और स्पेशल मेडिसिन की यूरोपीय मार्केट में एंट्री आसान होगी।

कार्बन टैक्स से राहत की उम्मीद: यूरोप ने 1 जनवरी 2026 से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी CBAM लागू किया है। यूरोप ने 2050 तक अपना कार्बन इमिशन जीरो करने का लक्ष्य रखा है।

  • यूरोप में बाहर से आने वाले स्टील, एल्युमीनियम और हाइड्रोजन की चीजों पर 25-30% टैरिफ लग रहा है।
  • इससे भारत को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, लेकिन अब ट्रेड डील के बाद भारत को राहत मिल सकती है।

इसके अलावा भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएगा।

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