सरकारी अस्पतालों से भी सस्ता होगा इलाज, खान सर ने खोला Hospital, देखें रेट चार्ट

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बिहार के फेमस टीचर खान सर ने पटना में एक ऐसा कम लागत वाला अस्पताल (khan sir hospital) शुरू किया है, जिसकी फीस कई मामलों में सरकारी अस्पतालों से भी कम रखी गई है। इस अस्पताल का मकसद उन लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है, जो महंगे निजी इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।

यह अस्पताल बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक उम्मीद बनकर उभरा है।  खान सर की यह पहल दिखाती है कि अगर सोच सेवा की हो, तो एक व्यक्ति भी बड़े सिस्टम में बदलाव ला सकता है। खान सर ने बताया कि इस पहल की प्रेरणा उन्हें अपनी मां से मिली। उनकी मां ने एक दिन सवाल किया कि जब शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाया जा सकता है, तो गरीबों के लिए इलाज क्यों नहीं। इसी बातचीत ने एक बड़े सामाजिक प्रोजेक्ट की नींव रखी।

7 में ब्लड टेस्ट, 25 में ECG
इस अस्पताल की सबसे खास बात इसकी बेहद कम फीस है। यहां ब्लड टेस्ट सिर्फ ₹7 में किया जा रहा है, जबकि ECG की कीमत ₹25 रखी गई है। इसके अलावा एक्स-रे ₹35 और डिजिटल एक्स-रे ₹70 में उपलब्ध है। इन दरों का उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और कम आय वाले परिवारों को समय पर इलाज के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि बीमारी के डर के साथ आर्थिक बोझ भी न झेलना पड़े।

आधुनिक मशीनें, लेकिन मुनाफा नहीं
इतनी कम फीस के बावजूद अस्पताल में आधुनिक मेडिकल सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया गया है। यहां एडवांस डायलिसिस यूनिट, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और हाई-टेक मशीनें लगाई गई हैं। संक्रमण से बचाव के लिए ऑपरेशन एरिया में टाइल्स की जगह खास मेडिकल-ग्रेड मैट्स का इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि टाइल्स की दरारों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

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मरीजों और परिजनों के लिए मुफ्त भोजन
अस्पताल में मरीजों और उनके साथ आए परिजनों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था भी की गई है। खान सर का मानना है कि भूखा परिवार मरीज की ठीक से देखभाल नहीं कर सकता। अस्पताल की पूरी व्यवस्था सम्मान, साफ-सफाई और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित है।

मां की निगरानी में तय हुई फीस
खान सर ने साफ किया है कि यह अस्पताल पूरी तरह नॉन-प्रॉफिट है। यहां रखी गई फीस बिजली और रखरखाव का खर्च निकालना भी मुश्किल से पूरा कर पाती है। उन्होंने बताया कि जब शुरुआती रेट तय किए गए थे, तो उनकी मां ने उन्हें और कम करने को कहा, ताकि “सबसे गरीब इंसान” भी इलाज करा सके। इसी वजह से उनकी मां खुद फीस व्यवस्था पर नजर रखती हैं।

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