लोकसभा में मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation sindoor) को लेकर दूसरे दिन भी चर्चा जारी रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या की, जिसके बाद भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की अनुमति दी। भारतीय सेना ने आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।
शाह ने दी ऑपरेशन महादेव की जानकारी
गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि 28 जुलाई को हुए ‘ऑपरेशन महादेव’ (Operation Mahadev) में तीन खूंखार आतंकियों सुलेमान, फैजल अफगान और जिब्रान को ढेर कर दिया गया। इनमें सुलेमान लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर था, जबकि बाकी दो आतंकी ‘A’ कैटेगरी के थे। तीनों हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल थे।
उन्होंने कहा कि, “पहलगाम में टूरिस्टों को धर्म पूछकर मारा गया, यह घोर निंदनीय है। मैं शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।”
अमित शाह ने बताई पूरी प्लानिंग
- 23 अप्रैल को तय किया, हत्यारे भागने ना पाएं: 23 अप्रैल को सुरक्षा मीटिंग हुई। इसमें निर्णय हुआ कि हत्यारे पाकिस्तान भागने न पाएं। इसकी हमने पुख्ता व्यवस्था की।
- 22 मई को इंटेल आई, सिग्नल मिले: IB को सिग्नल मिल गए और इंटेल आई, जिसमें दाचीगाम में आतंकियों की मौजूदगी की बात थी। इस सूचना को पुख्ता करने के लिए मई से जुलाई तक प्रयास किए। इसके बाद हमारे अधिकारी इस एरिया में आतंकियों के सिग्नल हासिल करने के लिए घूमते रहे।
- 22 जुलाई को पुष्टि हुई, 28 जुलाई को आतंकियों को मार डाला: सेंसर के माध्यम से दाचीगाम में आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई। पुलिस, सेना के जवानों ने आतंकियों को घेरने का काम किया। इसके बाद 28 जुलाई को मार डाला।
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चीनी उपकरण बना आतंकियों की मौत की वजह
इस ऑपरेशन में एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। खुफिया एजेंसी के मुताबिक, मारे गए पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा की लोकेशन मिलने में चीन निर्मित अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो उपकरण की भूमिका रही। माना जाता था कि इस उपकरण से होने वाली बातचीत को ट्रेस करना मुश्किल है, लेकिन इस बार यही तकनीक मूसा की मौत की वजह बन गई।
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कैसे मिली मूसा की सटीक लोकेशन?
खुफिया अधिकारियों को सूचना मिली कि दाचीगाम नेशनल पार्क के पास इस रेडियो डिवाइस का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि शुरू में कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला, लेकिन जैसे ही रविवार की रात करीब 2 बजे आतंकियों ने सीमा पार पाकिस्तान में अपने आकाओं से रेडियो के जरिए संपर्क किया, उनकी सटीक लोकेशन ट्रेस हो गई। इसके बाद सेना ने 16 किलोमीटर पैदल चलकर ‘महादेव पीक’ पर कार्रवाई की, जहां तीनों आतंकी मारे गए। यह क्षेत्र बेहद दुर्गम है और ऑपरेशन को अंजाम देना आसान नहीं था।
स्थानीय मददगारों की तलाश जारी
अब सुरक्षा एजेंसियां उन स्थानीय नेटवर्क्स और मददगारों की तलाश कर रही हैं, जो मूसा और उसके साथियों को जम्मू-कश्मीर में सहायता दे रहे थे। इन पर जल्द छापेमारी की जा सकती है।
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