लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सरकार को घेरते हुए भाषण दिया। अपने भाषण में उन्होंने भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब के कुछ हिस्सों का हवाला दिया। इसी बात पर सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।
राहुल गांधी के बयान पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें सदन के नियमों की याद दिलाई। सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस पर आपत्ति जताई।
दरअसल, राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब के उन अंशों का जिक्र किया, जो एक मैगजीन में छपे एक लेख में बताए गए थे। इसी आधार पर उन्होंने चीन को लेकर सरकार से सवाल पूछे और कहा कि चीनी सेना भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर रही है। इसके बाद सदन का माहौल और ज्यादा गरमा गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी किताब के हवाले से संसद में बयान देना सही नहीं है और राहुल गांधी गलत संदर्भ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या है फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी किताब?
राहुल गांधी संसद में जिस किताब के आधार पर डोकलाम में चीनी टैंक घुसने का दावा कर रहे हैं, वह पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने लिखी है। ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नामक यह किताब अभी पब्लिश नहीं हुई है। इसका हार्डकवर अप्रैल 2024 से ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर उपलब्ध है। किताब में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है।
2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे नरवणे ने इंडियन एक्सप्रेस के इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंग्विन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह प्रकाशन समूह और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।

कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे?
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने जनरल बिपिन रावत के बाद 31 दिसंबर 2019 को भारतीय सेना के 27वें आर्मी चीफ के रूप में पद संभाला था। वे अप्रैल 2022 में इस पद से सेवानिवृत्त हुए।इसके अलावा, 15 दिसंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक वे चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अस्थायी चेयरमैन भी रहे। 16 दिसंबर 2019 को उन्हें आधिकारिक तौर पर जनरल बिपिन रावत का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था।
आतंकवाद विरोधी अभियानों में रहा अहम रोल
जनरल नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ था। वे एक पूर्व वायुसेना अधिकारी के बेटे हैं और उनके पास डिफेंस स्टडीज में एमफिल की डिग्री है। उन्होंने जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन से सेना में सेवा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की एक बटालियन और 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। जनरल नरवणे असम राइफल्स के प्रमुख भी रहे और उन्होंने कश्मीर व पूर्वोत्तर भारत में कई आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया।
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