Metro In Dino Review: ये फिल्म नहीं.. भागती ज़िंदगी में थमती भावनाओं की सच्ची कहानी है..

अगर आप धीमी गति से चलने वाली, भावनाओं पर केंद्रित फिल्में पसंद करते हैं, तो “Metro... In Dino” आपको निराश नहीं करेगी।

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डायरेक्टर: अनुराग बसु
रिलीज डेट: 4 जुलाई 2025
प्रोड्यूसर: भूषण कुमार, अनुराग बसु
बेस्ड ऑन: Life in a… Metro की थीम
जॉनर: रिलेशनशिप ड्रामा
कास्ट: अनुपम खेर, नीना गुप्ता, कोंकणा सेन शर्मा, पंकज त्रिपाठी, आदित्य रॉय कपूर, सारा अली खान, अली फज़ल, फातिमा सना शेख
रेटिंग: 4/5
कॉम्पोज़र: प्रीतम
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
एडिटिंग: बोधादित्य बनर्जी, सत्यश गोवंड

अनुराग बसु की फिल्म “Metro… In Dino” आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। यह फिल्म 2007 में आई Life in a… Metro की तरह शहरी रिश्तों, अकेलेपन, और भावनात्मक उलझनों पर आधारित है, लेकिन इस बार नई पीढ़ी की संवेदनाओं और संघर्षों को ध्यान में रखकर गढ़ी गई है।

फिल्म की कहानी
“Metro… In Dino” एक एंथोलॉजी ड्रामा है जिसमें कई कहानियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। हर किरदार अपने-अपने रिश्तों में उलझा हुआ है — कोई ब्रेकअप से जूझ रहा है, तो कोई भरोसे की तलाश में है। फिल्म में शहरी जीवन की तेज़ रफ्तार के बीच भावनाओं की धीमी परतें खुलती हैं। इस बार मुंबई के अलावा बाकी मेट्रो शहर दिल्‍ली, बेंगलूर, कोलकाता और पुणे को भी एक्‍सप्‍लोर किया गया है।

कहानी कोलकाता में रहने वाली शिवानी (नीना गुप्‍ता) और संजीव (शाश्‍वत चटर्जी) की दो बेटियों और उनसे जुड़े लोगों के आसपास की है। बड़ी बेटी काजोल (कोंकणा सेन शर्मा) की पति मांटी (पंकज त्रिपाठी) के साथ शादी को 19 साल हो चुके हैं। बाहर से उनकी जिंदगी परफेक्‍ट दिखती है पर है नहीं। उनकी 15 साल की बेटी की अपनी दुविधा है। काजोल की छोटी बहन चुमकी (सारा अली खान) यूं तो एचआर कंसल्‍टेंट है, लेकिन दब्‍बू मिजाज की है। आते जाते उसका अधेड़ उम्र का बास यहां वहां छूता है। गुस्‍सा आने के बावजूद वह बर्दाश्‍त करती है। चुमकी अपने सहकर्मी से प्यार करती है और जल्‍द ही दोनों की मंगनी होने वाली है।

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एक नाटकीय घटनाक्रम में उसकी मुलाकात ट्रैवल ब्‍लागर पार्थ (आदित्‍य राय कपूर) से होती है। दोनों के बीच मेलजोल बढ़ता है। बिंदास पार्थ का दोस्‍त आकाश (अली फजल) म्‍यूजीशियन बनना चाहता है, लेकिन श्रुति (फातिमा सना शेख) से शादी और पारिवारिक जिम्‍मेदारियों के चलते उसके सपने पीछे छूट गए हैं। उधर, शिवानी के भी शादी से पहले सपने थे, लेकिन पारिवारिक जिम्‍मेदारियों में दबकर रह गए। कॉलेज की रीयूनियन पार्टी में वह अपने पूर्व प्रेमी परिमल (अनुपम खेर) से मिलती है। इन पात्रों के जरिए रिश्‍तों के अलग-अलग पहलू खंगाले गए हैं।

कलाकारों का अभिनय
आदित्य रॉय कपूर और सारा अली खान की जोड़ी पहली बार साथ नजर आई है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री सहज है, हालांकि कुछ सीन्स में अभिनय थोड़ा बनावटी लगता है। पंकज त्रिपाठी, नीना गुप्ता, कोंकणा सेन शर्मा और अली फजल जैसे कलाकार अपने किरदारों में जान डालते हैं और फिल्म को भावनात्मक गहराई देते हैं।

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निर्देशन और पटकथा
अनुराग बसु ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे मानवीय रिश्तों को बारीकी से पकड़ने में माहिर हैं। लेकिन इस बार फिल्म की गति धीमी है और कुछ कहानियां अधूरी सी लगती हैं। पटकथा में मजबूती है, लेकिन क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म थोड़ी लंबी लगने लगती है।

संगीत और तकनीकी 
प्रीतम का संगीत एक बार फिर फिल्म की जान बनकर उभरता है। “In Dino” गाने का नया वर्जन पुरानी यादें ताज़ा करता है, जबकि कुछ नए गाने भी दिल को छू जाते हैं। सिनेमैटोग्राफी उम्दा है, खासतौर पर शहर के भावनात्मक पहलुओं को कैमरे में कैद करना उल्लेखनीय है।

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फिल्म क्यों देखें
अगर आप धीमी गति से चलने वाली, भावनाओं पर केंद्रित फिल्में पसंद करते हैं, तो “Metro… In Dino” आपको निराश नहीं करेगी। हालांकि यह फिल्म हर दर्शक के लिए नहीं है — इसमें मसाला, एक्शन या रोमांच नहीं, बल्कि जिंदगी की कड़वी-मीठी सच्चाइयों की परतें हैं।

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