Hartalika Teej Katha: हरतालिका तीज कल, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहर्त और व्रत कथा

हरतालिका तीज तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को दोपहर 12:35 बजे से और इसका समापन 26 अगस्त को दोपहर 1:55 बजे होगा।

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इस साल हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रख शाम को सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और रिश्ते में मधुरता बनी रहे इसके लिए व्रत कथा का पाठ करती हैं।

हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहर्त
इस बार हरतालिका तीज तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को दोपहर 12:35 बजे से और इसका समापन 26 अगस्त को दोपहर 1:55 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा। इस दौरान आप विधिवत रूप से पूजा-पाठ कर सकते हैं।

हरतालिका तीज (Hartalika Teejपूजा साम्रगी

  • माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा
  • कलश
  • घी का दीपक
  • अक्षत
  • फूल
  • धूप
  • फल
  • मिठाई
  • सिंदूर
  • चंदन
  • माता पार्वती के लिए श्रृंगार सामग्री
  • माता पार्वती और भगवान को चढ़ाने के लिए नए वस्त्र
  • पूजा की थाली
  • नैवेद्य
  • पंचामृत
  • शंख
  • चौकी
  • पान का पत्ता

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हरतालिका तीज (Hartalika Teej Pooja Vidhi) कैसे करें पूजा करें?

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • एक चौकी पर शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
  • शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी और मेहंदी अर्पित करें। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
  • शिव और पार्वती को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ओम नमः शिवाय और ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः मंत्र का जाप करें।
  • हरतालिका तीज की कथा सुनें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • प्रसाद बनाकर ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दें।

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हरतालिका तीज (Hartalika Teej Katha) कथा
पुराणों के अनुसार, एक बार हिमालय की पुत्री पार्वती जी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने की इच्छा से कठोर तपस्या आरंभ की। पार्वती जी ने अनेक जन्मों तक शिवजी को पाने के लिए घोर तप किया। किंवदंती है कि नारद मुनि ने हिमालय जी को पार्वती जी का विवाह भगवान विष्णु से करने का सुझाव दिया। जब पार्वती जी को इसका पता चला तो वे बहुत दुखी हुईं। अपनी सखियों के साथ वे घने जंगल में चली गईं और वहीं शिवजी को पति रूप में पाने के लिए तप करने लगीं।

पार्वती जी की यह तपस्या अत्यंत कठिन थी। उन्होंने भोजन-पानी का त्याग कर केवल मिट्टी की मूर्ति बनाकर शिवजी का पूजन और आराधना की। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाने का वचन दिया। इस प्रकार पार्वती जी ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह व्रत किया और अंततः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। तभी से यह व्रत हरतालिका तीज कहलाया।

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