भारत में हर साल सितंबर महीने में आने वाली कन्या संक्रांति को खास वजह से याद किया जाता है। यही वह दिन है जब देशभर के कारखाने, फैक्ट्रियां, दुकानें और दफ्तर रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा उठते हैं। वजह है भगवान विश्वकर्मा (Vishwakarma Puja) की पूजा, जिन्हें ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर और शिल्पकार कहा जाता है।
इस दिन सिर्फ मशीनें और औजार ही नहीं, बल्कि आज के डिजिटल युग में लैपटॉप और मोबाइल जैसे उपकरण भी सजाए जाते हैं और उन पर पूजा अर्चना होती है। मान्यता है कि इससे काम में तरक्की, कारोबार में लाभ और घर में सुख-समृद्धि आती है।
कब है विश्वकर्मा पूजा Vishwakarma Puja 2025?
साल 2025 में विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja 2025) का पर्व 17 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 16 सितंबर की रात 1:47 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद 17 तारीख को सूर्योदय से ही पूजा का संयोग बन जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल विश्वकर्मा पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होंगे।
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Vishwakarma Puja 2025 पूजा क्यों है खास?
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। उन्हें ब्रह्मा का सातवां पुत्र माना जाता है। विश्वकर्मा ने ही स्वर्ग के महल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र जैसे दिव्य शस्त्र बनाए थे। यही वजह है कि उन्हें सृष्टि का पहला वास्तुकार और इंजीनियर कहा जाता है।

Vishwakarma Puja 2025 पूजा की विधि
- सुबह स्नान करके घर या कार्यस्थल की साफ-सफाई करें।
- मशीनों और औजारों को धोकर सजाएं।
- चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीप, धूप, फूल, चावल और भोग अर्पित करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद परिवार व कर्मचारियों में बांटें।




































