करवा चौथ 2025: अखंड सौभाग्य के लिए ज़रूरी हैं ये 4 मंत्र, जानें कब और कैसे करें जाप?

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करवा चौथ हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन व्रतों में से एक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं — यानी न तो भोजन करती हैं और न ही पानी पीती हैं।

शाम के समय वे भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और करवा माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि करवा चौथ की पूजा मंत्रों (Karwa Chauth mantra) के बिना अधूरी रहती है क्योंकि मंत्र जाप से पूजा न केवल पूर्ण होती है, बल्कि उसका फल भी कई गुना बढ़ जाता है। चलिए जानते है वे कौनसे मंत्र हैं…

गणेश जी का मंत्र:
किसी भी पूजा की शुरुआत गणेश जी की आराधना से ही होती है ताकि सभी कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हों। करवा चौथ की पूजा में भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए यह मंत्र जाप करें- मंत्र: वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”  इस मंत्र के जाप से व्रत में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और पति के जीवन में आने वाले संकटों का निवारण होता है।

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करवा माता का मंत्र:
करवा चौथ की पूजा में करवा माता का विशेष महत्व है। उनके पूजन से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। मंत्र: ॐ शिवायै नमः” या “ॐ नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं देहि मे॥” इस मंत्र के जाप से करवा माता प्रसन्न होकर दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और स्थिरता बनाए रखती हैं।

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चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र:
चंद्रमा को शीतलता, शांति और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। करवा चौथ की रात चांद को अर्घ्य देते समय यह मंत्र अवश्य बोलें-  मंत्र: “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ चन्द्रमसे नमः” इस मंत्र का जाप पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए किया जाता है।

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माता पार्वती का मंत्र:
माता पार्वती को अखंड सौभाग्य की देवी कहा गया है। करवा चौथ की पूजा उनके बिना अधूरी मानी जाती है। मंत्र: “हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा माम् कुरु कल्याणी कान्त कान्ताम् सुदुर्लभाम्॥” इस मंत्र के जाप से विवाह में सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि बनी रहती है, और दांपत्य जीवन शिव-पार्वती की तरह अटूट हो जाता है।

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