श्रम संहिताओं व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ हनुमानगढ़ में एकदिवसीय विशाल धरना–प्रदर्शन

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– राष्ट्रपति के नाम 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर संगठनों ने सरकार की नीतियों को बताया जनविरोधी
हनुमानगढ़। संयुक्त केन्द्रीय श्रमिक संगठन, अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू तथा खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त आह्वान पर बुधवार 26 नवंबर को जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पर एकदिवसीय विशाल धरना, प्रदर्शन एवं महासभा का आयोजन किया गया। श्रमिक, किसान व मजदूर संगठनों द्वारा केन्द्र सरकार की जनविरोधी नीतियों, मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं, किसान विरोधी कानूनों, फसलों के नुकसान, बीमा क्लेम, मनरेगा, स्मार्ट मीटर सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया।
संगठनों ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों के हित में चार नई श्रम संहिताओं को अचानक लागू कर दिया, जबकि इस निर्णय पर न तो किसी श्रमिक संगठन से राय ली गई और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया गया। वक्ताओं ने इसे मजदूर वर्ग पर सीधा वार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार श्रमिकों के अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की मूल भावना को कमजोर कर रही है।
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बलवान पूनिया, जिला परिषद डायरेक्टर मंगेश चौधरी, सीटू जिला अध्यक्ष आत्मा सिंह, रामेश्वर वर्मा, रघुवीर सिंह वर्मा, शेर सिंह शाक्य और बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पांच वर्ष पूर्व किसान आंदोलन के दौरान देशभर से दिल्ली पहुंचे लाखों किसानों के संघर्ष और 750 से अधिक किसानों की शहादत के बाद वापस लिए गए कृषि कानूनों को अब सरकार चोर दरवाजे से लागू करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा, किसान सभा, सीटू, खेत मजदूर यूनियन, जनवादी महिला समिति और नौजवान सभा इन प्रयासों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
सभा के दौरान 13 सूत्रीय मांगपत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें चारों श्रम संहिताओं को तत्काल निरस्त करने, सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने हेतु कानून बनाने, बकाया फसल बीमा क्लेम जारी करने, अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों और मकानों का मुआवजा देने, स्मार्ट मीटर बंद करने और मनरेगा कार्य तुरंत चालू कर बकाया भुगतान करने की मांग शामिल थी। इसके अतिरिक्त बिजली दरें वापस लेने, दलित–आदिवासी–महिलाओं पर बढ़ते दमन को रोकने, टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री बंद करने, किसानों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लेने, क्षेत्र में बढ़ रहे चिट्टा नशे पर कार्रवाई करने तथा विभिन्न गांवों में जल निकासी संबंधी स्थाई प्रबंध करने जैसी स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया।

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