वित्त मंत्री ने संसद में पेश किया आर्थिक रिपोर्ट कार्ड, जानिए क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे?

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ यानी इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) लोकसभा में पेश किया। इस सर्वे में बताया गया है वित्त वर्ष 2026-2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% की रेंज में रहने का अनुमान है।इस सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने तैयार किया है।

सर्वे में बताया गया है कि भारत की मजबूत आर्थिक नींव, सरकार द्वारा किए गए सुधार और निजी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों से विकास को गति मिलेगी। हालांकि, वैश्विक स्तर पर हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, जैसे अमेरिका के सख्त टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी अनिश्चितताएं।

इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है?
ये देश की अर्थव्यवस्था का सालाना रिपोर्ट कार्ड होता है। इसमें पिछले 1 साल में देश की आर्थिक स्थिति का पूरा हिसाब-किताब होता है। इससे पता चलता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है। इकोनॉमिक सर्वे में बीते साल का हिसाब-किताब और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान का जिक्र रहता है। इकोनॉमिक सर्वे को आमतौर पर बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है। आसान भाषा में समझे तो, इकोनॉमिक सर्वे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर है। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी है और इसमें सुधार के लिए क्या करने की जरूरत है।

वैश्विक संस्थानों के अनुमान से मेल
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की 7.4% विकास दर का अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के अनुमानों के करीब है। IMF ने भारत की विकास दर 7.3% और विश्व बैंक ने 7.2% बताई है। वहीं 2026-27 में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।

सुधारों पर सरकार का जोर
इकोनॉमिक सर्वे में हाल के बड़े सुधारों का जिक्र किया गया है। इनमें जीएसटी व्यवस्था, इनकम टैक्स में राहत, अप्रैल से लागू होने वाला नया और सरल डायरेक्ट टैक्स कानून, विदेशी निवेश (FDI) नियमों में बदलाव और दिवालिया कानून को मजबूत करना शामिल है। सरकार का मानना है कि अब निजी क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और रोजगार सृजन में ज्यादा निवेश करना होगा, ताकि अर्थव्यवस्था लंबे समय तक मजबूत बनी रहे।

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AI और वैश्विक जोखिमों की चेतावनी
सर्वे में IMF की चेतावनी का हवाला दिया गया है, जिसमें AI से जुड़े “बुलबुले” की बात कही गई है। अगर बाजार में अचानक गिरावट आती है तो इससे निवेश पर असर पड़ सकता है और लोगों की संपत्ति को नुकसान हो सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता पर फोकस
भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग रणनीति को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसका मकसद वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाना, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना और नए व्यापारिक साझेदार बनाना है। साथ ही, सेमीकंडक्टर जैसे अहम सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने पर भी जोर दिया जा रहा है।

महंगाई काबू में
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुसार, इस साल महंगाई दर करीब 2% रह सकती है, जो उसके 4% के लक्ष्य से काफी कम है। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट है। हालांकि, कम महंगाई की वजह से नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) की वृद्धि घटकर 8% रह सकती है, जो बजट में तय 10.1% के लक्ष्य से कम है।

निजी निवेश जरूरी
सरकार का पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 5.93 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 11.21 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह जीडीपी का 3.1% है। लेकिन इकोनॉमिक सर्वे साफ तौर पर कहता है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी खर्च के साथ-साथ निजी निवेश को भी तेजी से बढ़ाना होगा। कुल मिलाकर, इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थिर बताता है, लेकिन आने वाले वर्षों में विकास को बनाए रखने के लिए निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका को जरूरी मानता है।

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