26 नवंबर देशव्यापी आंदोलन में शामिल होने का आह्वान — संयुक्त मज़दूर-किसान संगठनों की बैठक संपन्न

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– चार लेबर कानूनों को मजदूर-किसान विरोधी करार — पूर्व विधायक बलवान पूनिया तथा वरिष्ठ कामरेडों का सरकार पर तीखा हमला
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय ग्रामीण एवं खेत मजदूर यूनियन तथा भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) की संयुक्त बैठक सोमवार को भगत सिंह यादगार केंद्र लाल चौक पर आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ वामपंथी नेता कामरेड आत्मा सिंह ने की। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कानूनों को मजदूर-किसान विरोधी बताते हुए व्यापक चर्चा की गई तथा 26 नवंबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी विरोध आंदोलन में अधिकतम संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि श्रम सुधारों के नाम पर तैयार किए गए चारों लेबर कोड मजदूरों के हितों को समाप्त करने, ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रहार करने तथा कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की नीतियों का हिस्सा हैं। पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने आरोप लगाया कि इन कानूनों से मजदूरों की सुरक्षा, स्थायी रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, वेतन निर्धारण और यूनियन गठन के अधिकार कमजोर हो जाएंगे, जो वर्षों के संघर्ष से अर्जित किए गए थे। पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने कहा कि श्रम सुधारों की वर्तमान संरचना केवल निजी कंपनियों और पूंजीपतियों के हित में है। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के अवसर पहले ही घट रहे हैं, ऐसे में ये कानून मजदूरों और किसानों के भविष्य को और अधिक असुरक्षित बना देंगे। उन्होंने आह्वान किया कि 26 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध रैली में एकजुट होकर सरकार को उसका वास्तविक जनविरोधी चेहरा दिखाना होगा।
कामरेड रघुवीर वर्मा, कामरेड रामेश्वर वर्मा और कामरेड चन्द्र कला वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण और खेत मजदूर पहले ही आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं। मनरेगा में कटौती, कृषि संकट, महंगाई और बेरोजगारी ने किसानों-मजदूरों को तोड़कर रख दिया है। ऐसे में श्रम अधिकारों को कमजोर करना सीधे-सीधे मेहनतकश वर्ग के जीवन और भविष्य पर हमला है।
बैठक में कामरेड शेर सिंह शाक्य, बहादुर सिंह चौहान, सेवक सिंह, सुल्तान खान, कामरेड रिछपाल सिंह राठौड़, कामरेड ओमप्रकाश, कामरेड बसंत सिंह, कामरेड गुरुप्रेम, कामरेड बलदेव सिंह मक्कासर, रामचन्द्र, वली शेर, संदीप बसोड, प्रमोद साहनी, जगजीत सिंह पिलीबंगा कामरेड राम सिंह, विनय कुमार और लाल सिंह सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
मजदूर नेता शेर सिंह शाक्य ने कहा कि मजदूर-किसान एकता ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है और सरकार को मजबूर किया जाएगा कि वह इन श्रम कानूनों को वापस ले। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि 26 नवंबर को होने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन को जिले के हर गांव, हर मजदूर बस्ती और हर श्रमिक संगठन तक पहुंचाया जाए तथा मजदूर-किसान-युवाओं-महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
अंत में अध्यक्ष कामरेड आत्मा सिंह ने सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल श्रम कानूनों का नहीं बल्कि संविधान, अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर को लाल झंडे के नीचे एकजुट होकर एक ऐतिहासिक प्रदर्शन किया जाएगा, जो मेहनतकश वर्ग की आवाज देशभर में बुलंद करेगा।

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