West Bengal Election: जानिए क्यों पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सियासी जमीन लगातार खिसकती जा रही

237

पश्चिम बंगाल (West Bengal Election )में कांग्रेस इस वक्त अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसा अनुमान पिछले कुछ चुनावों के बाद लगाया जा रहा है कि पार्टी का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है। जहां टीएमसी और बीजेपी लगातार बंगाल पर फोकस बढ़ा रही है। इसके उलट कांग्रेस और वाम दल अब तक सिर्फ बैठकों और मंथन तक ही सीमित हैं। इसी को देखते हुए ये संकेत मिल रहे हैं कि 2026 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में उतर सकते हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की संभावना है।

बीते एक दशक से राज्य की राजनीति मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के इर्द-गिर्द घूम रही है। 2011 के बाद से कांग्रेस की मौजूदगी लगातार सिमटती चली गई है, चाहे लोकसभा हो या विधानसभा।

टीएमसी और बीजेपी की सीधी टक्कर में कांग्रेस और लेफ्ट दोनों ही कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। जनवरी 2026 में CPI(M) की केंद्रीय समिति की बैठक में यह संकेत दिए गए थे कि बंगाल में टीएमसी और बीजेपी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस के साथ तालमेल किया जा सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चुनाव में अब बहुत कम वक्त बचा है और अब तक किसी भी तरह का ठोस गठबंधन सामने नहीं आया है।

क्या केरल फैक्टर बना सबसे बड़ी अड़चन
केरल में भी 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां कांग्रेस और CPI(M) आमने-सामने हैं। अगर बंगाल में दोनों साथ आते हैं तो केरल में इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दोनों दल बंगाल में गठबंधन को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

  • 2014: कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा, 42 में से 4 सीटें जीती

  • 2019: सभी दल अलग-अलग लड़े, कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर सिमटी

  • 2024: कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली, अधीर रंजन चौधरी भी हार गए

इन नतीजों से साफ है कि बंगाल में कांग्रेस की पकड़ लगातार कमजोर होती गई।

विधानसभा चुनावों में भी नहीं मिली राहत

  • 2011: कांग्रेस-टीएमसी गठ दिखाया था, सत्ता में बदलाव हुआ

  • 2016: लेफ्ट के साथ गठबंधन, फिर भी टीएमसी की बड़ी जीत

  • 2021: लेफ्ट और ISF के साथ गठबंधन, कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला

गठबंधन के बावजूद कांग्रेस को कोई ठोस फायदा नहीं मिला।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

गठबंधन के बाद भी क्यों नहीं बदली तस्वीर?
2021 के विधानसभा चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जब लेफ्ट और कांग्रेस मिलकर भी एक भी सीट नहीं जीत सके। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि अकेले चुनाव लड़कर संगठन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश ज्यादा बेहतर होगी। वहीं यह भी डर है कि अलग-अलग लड़ने पर वोटों का बिखराव बढ़ेगा और बीजेपी को अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा।

लेफ्ट-कांग्रेस साथ आए बिना क्यों बिखर सकता है विपक्षी वोट?
ममता बनर्जी का संगठनात्मक आधार बंगाल में बेहद मजबूत है। वहीं बीजेपी ने 2016 के बाद से राज्य में तेजी से अपनी पकड़ बढ़ाई है। ऐसे में अगर लेफ्ट और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो विपक्षी वोट और ज्यादा बंट सकता है, जिसका सीधा फायदा टीएमसी या बीजेपी को मिल सकता है। हालांकि कांग्रेस अब तक इस गठबंधन को लेकर स्पष्ट ‘हां’ नहीं कह पाई है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।