मनरेगा के अधिकार खत्म करने के विरोध में माकपा का ज्ञापन

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-राष्ट्रपति के नाम सौंपा पत्र, ग्रामीण मजदूरों से धोखा बताया
हनुमानगढ़। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए बदलावों के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ के माध्यम से भेजा गया, जिसमें केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरों के रोजगार के अधिकार को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया गया।
ज्ञापन में माकपा नेता रामेश्वर वर्मा ने कहा कि मनरेगा कानून ग्रामीण मजदूरों की लंबी और संघर्षपूर्ण लड़ाई के बाद अस्तित्व में आया था। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक मजदूर को वर्ष में कम से कम 100 दिन का रोजगार पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त था। यदि सरकार 100 दिन का रोजगार उपलब्ध नहीं करवा पाती थी, तो मजदूर को रोजगार भत्ता दिए जाने का भी स्पष्ट प्रावधान था। मजदूर वर्ष में अपनी आवश्यकता के अनुसार जब चाहे काम की मांग कर सकता था और सरकार पर उसे काम उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी थी।
सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले ही इस कानून से पीछे हटने लगी थी। पिछले वर्ष पूरे देश में मात्र लगभग पांच प्रतिशत मजदूरों को ही 100 दिन का कार्य मिल पाया, जबकि आवश्यकता इस कानून को और अधिक मजबूत करने की थी। इसके विपरीत सरकार ने मनरेगा जैसे कानूनी अधिकार को समाप्त कर उसे “विकसित भारत ग्रामीण गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन” नामक योजना में बदल दिया।

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