पटना सिटी के मालसलामी थाना क्षेत्र के पीरदमरिया में पुलिस ने विकास उर्फ राजा को मुठभेड़ में मार गिराया। बताया जाता है कि गोपाल खेमका (Gopal Khemka) हत्याकांड में उसने हथियार सप्लाई किया था। पुलिस उससे पूछताछ करने पहुंची थी। तभी उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पटना सिटी SDPO-2, SP और SSP मौके पर पहुंचे। घटनास्थल से 1 पिस्टल, गोली और खोखा बरामद किया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है।
इससे पहले 8 जुलाई (सोमवार) को पुलिस ने शूटर उमेश उर्फ विजय को मालसलामी इलाके से ही गिरफ्तार किया था। उसने बताया कि 10 लाख में खेमका के मर्डर की सुपारी दी गई थी। एक लाख रुपए एडवांस मिला था। पुलिस ने गंगा किनारे के इलाके से हथियार भी बरामद कर लिया है। उमेश राय दिल्ली में विजय के नाम से रहता था।
SIT की टीम जब उमेश के घर पहुंची, तब वह बच्चे को लेने स्कूल गया था। इसी बीच पुलिस ने उसे दबोच लिया। वह घर से कम ही निकल रहा था। उसके पास से पुलिस ने घटना में इस्तेमाल बाइक, इसके बाद घर से पिस्टल, 80 कारतूस, दो मोबाइल और एक लाख कैश बरामद किया गया है।
इसे गिरफ्तार करने के बाद पटना जंक्शन से भी पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। उमेश की निशानदेही पर गोपाल खेमका मर्डर केस में कोतवाली थाना इलाके के उदयगिरी अपार्टमेंट में पुलिस और STF ने रेड की है। यहां से 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
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क्या है मामला
पटना के चर्चित व्यवसायी और मगध हॉस्पिटल के मालिक गोपाल खेमका की 4 जुलाई की रात हत्या कर दी गई। वे अपनी कार में बैठे थे, तभी गांधी मैदान थाना क्षेत्र स्थित उनके आवास के बाहर बाइक सवार दो हमलावरों ने करीब से फायरिंग की। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल खेमका को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के वक्त खेमका के साथ उनका बॉडीगार्ड और ड्राइवर भी मौजूद थे, लेकिन हमलावर मौके से फरार हो गए। बता दें, खेमका पटना के बड़े बिजनेस परिवार से थे, उनके बेटे गुंजन खेमका की भी 2017 में हत्या हो चुकी है।
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गोपाल खेमका की मौत से किसे फायदा-नुकसान
इस हत्या से बिहार में व्यवसायिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। खेमका परिवार को लगातार दूसरी बार एक बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। वहीं पुलिस की तेज़ कार्रवाई से अपराधियों में भय का संदेश देने की कोशिश की गई है। मगर एनकाउंटर को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं कि क्या विकास को जिंदा पकड़ कर पूरी साजिश का खुलासा नहीं किया जा सकता था?
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