– संचालकों ने जिला कलेक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। जिला गौशाला विकास समिति के बैनर तले जिले की सभी प्रमुख गोशालाओं के संचालकों ने अनुदान वितरण से जुड़े मौजूदा दिशा-निर्देशों को अव्यावहारिक बताते हुए उनमें संशोधन की मांग की है। इस संबंध में समिति ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में गोशालाओं को अनुदान दो किस्तों में दिया जाता था- प्रथम किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक और दूसरी किस्त 2 नवंबर से 31 मार्च तक। संचालकों का कहना है कि यह व्यवस्था व्यावहारिक थी और समय पर गोशालाओं को राहत पहुंचाती थी। मगर वर्तमान दिशा-निर्देशों में बदलाव के कारण अनुदान का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि पहली किस्त का भुगतान सितम्बर तक और दूसरी किस्त का भुगतान मई तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि गोशालाओं को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
संचालकों ने यह भी कहा कि आवेदन की अवधि बेहद सीमित रखी गई है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 20 सितम्बर तक किया जाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पहले गोशाला में आवासित गोवंश की संख्या के आधार पर ही अनुदान दिया जाता था, लेकिन अब अतिरिक्त औपचारिकताएँ थोप दी गई हैं। मार्च 2021 की राज्य स्तरीय गोपालन समिति की बैठक में कांटा पर्ची की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई थी, बावजूद इसके अभी भी बिलों में इसे मांगा जा रहा है। यह आदेशों की अवहेलना है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि राज्य स्तरीय समिति के निर्णय के अनुसार, एक वर्ष पुरानी और 100 गोवंश रखने वाली गोशालाओं को अनुदान का अधिकार है, लेकिन व्यवहार में दो वर्ष का समय लिया जा रहा है, जो गलत है। इसके अलावा, यदि कोई गोशाला 1 अप्रैल को पंजीकृत होती है, तो उसे प्रारंभिक चार माह का अनुदान नहीं दिया जा रहा है, जबकि पूर्व आदेशों में ऐसा नहीं था।
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