आठवें वेतन आयोग के टीओआर में पेंशन संशोधन शामिल करने की मांग

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– राजस्थान पेंशनर समाज ने प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। राजस्थान पेंशनर समाज जिला शाखा हनुमानगढ़ जंक्शन की ओर से आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) में मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन के पुनरीक्षण को शामिल करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री व केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से राजस्थान पेंशनर समाज जिला शाखा हनुमानगढ़ जं. के अध्यक्ष अशोक कुमार खत्री के नेतृत्व में पेंशनरों ने ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में हाल ही में वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) द्वारा 3 नवंबर 2025 को जारी राजपत्र अधिसूचना पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे पेंशनभोगियों के प्रति अन्यायपूर्ण बताया गया।
ज्ञापन में बताया गया कि केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों को अधिकांश राज्य सरकारें यथावत अपनाती हैं अथवा उनसे प्रेरणा लेकर अपनी पेंशन नीतियां तय करती हैं। ऐसे में केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा प्रभाव राज्य सरकारों के पेंशनरों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद 1 जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत्त पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के पेंशनभोगियों की पेंशन के पुनरीक्षण को आठवें वेतन आयोग की परिधि से बाहर रखना तर्कसंगत नहीं है।
पेंशनर समाज ने तर्क दिया कि यदि 1 जनवरी 2026 को वेतन का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है, तो उसी आधार पर पेंशन का पुनरीक्षण भी किया जाना न्यायोचित है। सुप्रीम कोर्ट के डी.एस. नाकरा बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए पेंशन को “Deferred Wages” यानी स्थगित वेतन बताया गया और कहा गया कि पेंशन सरकार की प्रतिबद्ध व्यय श्रेणी में आती है, जिसका बजट हर वर्ष बनाया और स्वीकृत किया जाता है। ऐसे में इसे ‘अनफंडेड कॉस्ट’ बताना वास्तविकता से परे है।

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