खेजड़ी बचाओ–पर्यावरण बचाओ आंदोलन के तहत जिला कलेक्टर कार्यालय पर धरना शुरू

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– सोलर कंपनियों को भूमि आवंटन पर रोक व खेजड़ी कटाई पर सख्त कानून की मांग
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, हनुमानगढ़ के तत्वावधान में खेजड़ी बचाओ–पर्यावरण बचाओ आंदोलन के अंतर्गत मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन प्रारंभ किया गया। धरने में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान व पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। आंदोलन की मुख्य मांग खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ सख्त कानून बनाने, सोलर कंपनियों को लगातार दिए जा रहे भूमि आवंटन पर रोक लगाने तथा भूमिहीनों को जमीन आवंटित करने की रही।
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के जिला अध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सोलर कंपनियों के दबाव में लगातार फैसले ले रही हैं। इसी का परिणाम है कि बीकानेर और जोधपुर जिलों में करीब दो लाख बीघा भूमि सोलर कंपनियों को आवंटित कर दी गई, जबकि वह भूमि सीलिंग एक्ट के अंतर्गत आती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भूमि में वन क्षेत्र भी शामिल था, जहां खेजड़ी सहित अनेक पेड़ मौजूद थे, जिन्हें बेरहमी से काट दिया गया।
जग्गी ने बताया कि पूरे राजस्थान में अब तक 6 लाख से अधिक खेजड़ी वृक्ष काटे जा चुके हैं, जबकि राज्य सरकार द्वारा मात्र 1000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है। यह जुर्माना सरकार की पर्यावरण के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि खेजड़ी जैसे कल्पवृक्ष को काटने वालों के लिए 7 वर्ष की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माना निर्धारित किया जाए, ताकि राजस्थान की पहचान, शान और पर्यावरण को बचाया जा सके।
इस अवसर पर संगठन के प्रदेश सचिव रघुवीर वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों के सामने नतमस्तक हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अब और 6 लाख बीघा भूमि सोलर कंपनियों को देने की तैयारी में है, जिससे करीब 18 लाख पेड़-पौधे, जिनमें बड़ी संख्या में खेजड़ी वृक्ष शामिल हैं, कट जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीकानेर से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे राजस्थान की जनभावनाओं का आंदोलन है।

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