फसल मुआवजा, जलभराव और मनरेगा सुधार सहित कई मांगों को लेकर दसवें दिन भी धरना जारी
हनुमानगढ़ टाउन के निकट स्थित गांव नोरंगदेसर में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले किसानों का धरना दसवें दिन भी जारी रहा। दीपावली के अवसर पर किसानों ने काली दीपावली मनाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार का पुतला फूंका, जिससे क्षेत्र में सरकार के प्रति गहरा रोष देखने को मिला। धरना स्थल पर किसानों ने उपतहसील कार्यालय नोरंगदेसर के बाहर एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों और महिला श्रमिकों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि वर्ष 2024 की फसल खराबे का मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिला है, जिससे किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि वर्ष 2025 की फसल खराबे की विशेष गिरदावरी (7D) की कार्रवाई तत्काल शुरू की जाए ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत मिल सके। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में जलभराव की समस्या अब भी बनी हुई है, जिससे कई खेतों में पानी भरा हुआ है और गेहूं की बिजाई पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था करने, पंपों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने तथा 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि किसान अपने खेतों से पानी निकाल सकें। सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि क्षतिग्रस्त मकानों, ढानियों और मृत पशुओं को विशेष गिरदावरी में शामिल कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मनरेगा कानून की सख्त पालना की मांग की। किसानों ने कहा कि मजदूरों को कानून के अनुसार 200 दिन का काम और ₹600 दैनिक मजदूरी दी जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों की आजीविका सुरक्षित रह सके। किसानों ने नेशनल हाईवे के नियमों के तहत आसपास के 20 गांवों को टोल फ्री करने की भी मांग रखी, जिससे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर किसान नेता मनीष बुरड़क, पाला सिंह सरा, कोमरेड जगजीत सिंह जग्गी, जयदेव भीडासरा, मनीष मक्कासर, लालचंद पाथडिया उपसरपंच, जय श्रीराम, सुरजभान शिलु, राजेंद्र चाहर, हेतराम शिलु, श्रवण सुथार, हंसराज भाट, शिव प्रकाश शर्मा, प्रथ्वीराज तेतरवाल, रजीराम तेतरवाल, भानीराम, भूपराज पाथडिया, चुन्नी राम नाई, विजय शिलु, कृपाराम सिहमार, दलबीर सिंह, सोहनलाल खालिया, इन्द्रजीत शर्मा, रामुरती गोदारा, हेमराज पुरोहित, इमिलाल मेघवाल, प्रभु जाखड़ और बलदेव सिंह दलबीर सिलवाला सहित अनेक किसान नेता व ग्रामीण मौजूद रहे।
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