पक्कासहारणा में राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन अंतर्गत किसान गोष्ठी आयोजित

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-तिलहनी फसलों में रोग-कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्वों पर दी गई जानकारी
हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत पक्कासहारणा में राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल) योजनान्तर्गत किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का उद्देश्य क्षेत्र के कृषकों को तिलहनी फसलों की उन्नत कृषि तकनीकों, रोग-कीट नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी देकर उत्पादन बढ़ाने के प्रति जागरूक करना रहा। गोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सहायक कृषि अधिकारी पक्कासहारणा गुरमेल सिंह ने तिलहनी फसलों में लगने वाले प्रमुख रोगों व कीटों की पहचान, उनके लक्षण तथा प्रभावी नियंत्रण उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर रोग-कीट प्रबंधन अपनाकर किसान उत्पादन हानि को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो।
कृषि पर्यवेक्षक सजीव सहारण ने तिलहनी फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग करने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों को इफको नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग, लाभ और सही विधि के बारे में भी जानकारी दी तथा बताया कि इन आधुनिक उर्वरकों के प्रयोग से लागत में कमी के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
गोष्ठी के दौरान उपस्थित कृषकों ने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया और कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताया। किसानों ने कहा कि ऐसी गोष्ठियों से उन्हें नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी मिलती है, जो व्यवहार में अपनाने योग्य होती हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की किसान गोष्ठियों के नियमित आयोजन की मांग की।

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