नई दिल्ली/लखनऊ: समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव (Dimple Yadav) इन दिनों एक मस्जिद में राजनीतिक बैठक में शामिल होने और उस दौरान पहने गए परिधान को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गई हैं। जहां एक ओर मौलाना साजिद रशीदी की विवादित टिप्पणी ने देशभर में नाराज़गी पैदा की, वहीं भाजपा और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी भी शुरू हो गई है।
डिंपल यादव हाल ही में लखनऊ में एक मस्जिद में पार्टी नेताओं और कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक में शामिल हुईं थीं। इस दौरान वह पारंपरिक साड़ी पहने हुए थीं, लेकिन मौलाना साजिद रशीदी ने दावा किया कि उनका “परिधान इस्लामी परंपरा के ख़िलाफ़” था। मौलाना ने कहा कि “महिलाओं को धार्मिक स्थल पर आते समय सिर ढकना चाहिए”, और उनके पहनावे को “गैर-मुनासिब” बताया।
मौलाना पर हुई FIR
इस बयान के विरोध में समाजवादी पार्टी और महिला सांसदों ने जोरदार विरोध जताया। लखनऊ पुलिस ने मौलाना साजिद रशीदी पर FIR दर्ज कर ली है। संसद में भी इस मुद्दे पर कई महिला सांसदों ने मौलिक अधिकारों और धार्मिक आज़ादी का हवाला देते हुए भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
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मौलाना ने क्या दी पूरे मामले पर सफाई
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि उन्होंने डिंपल यादव को लेकर किसी भी तरह का आपत्तिजनक बयान नहीं दिया है. उन्होंने कहा, ‘मैंने कोई ऐसा आपत्तिजनक बयान नहीं दिया। जो लोग सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ से वाकिफ हैं और जानते हैं कि अगर लड़की के सर से पल्लू हट भी जाता है तो उन्हें डांटा जाता है और कहा जाता है की नंगी घूम रही है क्या? हमारे समाज का मसला है।
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आपने देखा होगा पास में इकरा हसन बैठी हुई थीं, वे क्यों सर ढके हुए थीं? डिंपल यादव साफ करें कि मंदिर ऐसे ही जाती हैं क्या?’ बता दें कि डिंपल यादव संसद भवन के पास स्थित मस्जिद में गई थीं। उस वक्त उन्होंने कथित तौर पर अपने सिर पर पल्लू नहीं रखा था। मौलाना ने इसी को लेकर बयान दिया था। मौलाना साजिद रशीदी ने आगे कहा, ‘मैंने कोई गलत बयान नहीं दिया। FIR हो गई…उसकी समीक्षा होगी। आप मस्जिद की मर्यादा को तार’तार कर रहे हैं।

इस पूरे मामले पर डिंपल यादव ने मीडिया से कहा
सपा सांसद डिंपल यादव ने उनके खिलाफ ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी को लेकर NDA नेताओं के विरोध प्रदर्शन पर कहा, “…अच्छा होता यदि वे लोग मणिपुर जैसी घटना के खिलाफ भी इसी तरह प्रदर्शन करते और महिलाओं के साथ खड़े होते। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भाजपा के नेता और बड़े-बड़े मंत्रियों ने मंच से हमारे सेना के अफसरों के लिए जिस तरह की बयानबाजी की, अगर उनके खिलाफ वे(NDA नेता) खड़े दिखाई देते तो ज्यादा अच्छा होता।”
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