– फाटक गौशाला में गोमाता संरक्षण के संकल्प के साथ भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
हनुमानगढ़ टाउन की फाटक गौशाला, बरकत कॉलोनी, भटनेर दुर्ग के समीप गोमाता के पावन सानिध्य में पहली बार श्री खाटू श्याम बाबा जी की सत्य स्कंदपुराणोक्त कथा का भावपूर्ण आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन का शुभारम्भ आज कथा के यजमान अंकुर गर्ग एवं रुचि गर्ग द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। पंडित रामनारायण शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ कथा का विधिवत आरंभ कराया। इस अवसर पर फाटक गौशाला के अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल ने बताया कि गौशाला में बीमार, दुर्घटनाग्रस्त एवं असहाय गोवंश के बेहतर स्वास्थ्य और संरक्षण के उद्देश्य से यह कथा आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ की पावन धरा पर बाबा खाटू श्याम की कथा का यह पहला आयोजन है, जो धर्म, भक्ति और सेवा का अनुपम संगम है। कथा के चौथे दिन प्रसिद्ध कथा व्यास के. पी. लाटा ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और भक्तिरस से परिपूर्ण वाणी से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वे मोरछड़ी दरबार पदमपुर के निज सेवक भी हैं। कथा के दौरान उन्होंने महाभारत के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध छिड़ा, तब कौरवों ने बर्बरीक से सहायता मांगी। बर्बरीक ने वचन दे दिया था, किंतु जब श्री कृष्ण को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने बर्बरीक से कौरवों की सहायता न करने को कहा। वचनबद्ध बर्बरीक ने अपने संकल्प की बात कही, तब भगवान श्री कृष्ण ने उनसे उनका शीश दान स्वरूप ग्रहण किया। कथा के अनुसार, 14 देवियों के आदेश से बर्बरीक के शीश को अमरत्व का वरदान मिला। युद्ध देखने की इच्छा पर भगवान श्री कृष्ण ने शीश को ऊँची पहाड़ी पर स्थापित किया और वरदान दिया कि कलियुग में वे खाटू श्याम के नाम से पूजे जाएंगे तथा भक्तों के सभी कष्ट हरेंगे। कथा व्यास ने बताया कि कलियुग में जीवों के उद्धार हेतु श्री खाटू श्याम बाबा प्रकट हुए हैं। कथा के दौरान भजनों की सरिता भी बही, जिन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक कथा का आयोजन निरंतर जारी है। समापन पर भव्य आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। कथा व्यास और आयोजकों ने धर्मप्रेमी जनता से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने और गोमाता संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।
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