स्वतंत्रता दिवस की कवायद से शुरू हुआ GST रिफॉर्म (GST 2.0) का मुद्दा अब जोर पकड़ रहा है। सरकार ने अपने GST ढांचे में बड़ा बदलाव सुझाया है। खासकर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव। अगर यह मंजूर हुआ, तो पॉलिसीधारकों को सिर्फ बेस प्रीमियम ही चुकाना होगा, टैक्स नहीं।
इंश्योरेंस प्रोडक्ट पर जीएसटी हटाए जाने या घटने की उम्मीद में इस सेक्टर के शेयरों में आज तेजी देखने को मिल रही है। जीएसटी ग्रुप आफ मिनिस्टर (GoM) ने सुझाव दिया है कि हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम (Health and Life Insurance GST )पर जीएसटी न लगाया जाए। अगर जीएसटी काउंसिल और राज्यों के बीच सहमति बन गई तो इनडिविजुअल द्वारा खरीदे गए लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर 18% जीएसटी (GST) हटाया जा सकता है। ऐसा होने पर इस सेक्टर की ग्रोथ मजबूत हो सकती है।
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बीमा कंपनियों और ग्राहकों पर असर
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बीमा कंपनियों पर दबाव: यदि ITC खत्म हो गया, तो Standalone health insurers जैसे Star Health, Niva Bupa आदि अधिक प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उनके पास प्रीमियम से ITC ऑफसेट करने का विकल्प नहीं होता।
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बैंक और बड़े विमाकर्ता: SBI Life, HDFC Life, ICICI Prudential जैसी बड़ी कंपनियां बमुश्किल ही GST हटने पर प्रीमियम घटाएंगी इसका असर सीधे ग्राहक बचत पर पड़ना मुश्किल है।
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ग्राहकों के लिए रिअल फायदा: अगर GST 5% करके ITC बरकरार रही, तो ₹25,000 के वार्षिक प्रीमियम पर टैक्स ₹4,500 से घटकर ₹1,250 हो सकता है—₹3,250 की सीधी बचत।
क्या सचमुच कम होगा प्रीमियम?
पहली नज़र में जीएसटी हटने से बड़ा फायदा लगता है, लेकिन वित्तीय जानकार कहते हैं कि असलियत थोड़ी अलग हो सकती है। सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और सहज मनी के फाउंडर अभिषेक कुमार के मुताबिक, अगर जीएसटी की दर 18% से घटाकर 5% की जाती है और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) व्यवस्था जारी रहती है तो ग्राहकों का खर्च सीधे कम होगा।
लेकिन, अगर जीएसटी पूरी तरह शून्य कर दिया जाता है तो बीमा कंपनियों को ITC का फायदा नहीं मिलेगा। ऐसे में उनकी लागत बढ़ेगी और वे इसे ग्राहकों पर डालते हुए बेस प्रीमियम बढ़ा सकती हैं। यानी ग्राहकों को जितनी बचत की उम्मीद है, उतनी शायद न मिले।

ITC कैसे काम करता है?
अभी की व्यवस्था में बीमा कंपनियां अपने ऑपरेशनल खर्चों पर जो जीएसटी देती हैं, उसे ग्राहकों से वसूले गए जीएसटी के खिलाफ एडजस्ट कर सकती हैं। इसे ही इनपुट टैक्स क्रेडिट कहा जाता है। यानी ITC की मदद से बीमा कंपनियों का टैक्स बोझ कुछ हल्का हो जाता है और प्रीमियम दरें ज्यादा नहीं बढ़तीं। अगर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया तो यह सिस्टम खत्म हो जाएगा और लागत का दबाव सीधे ग्राहकों पर आ सकता है।
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